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कसमार : नहीं रहे बीएसएफ के सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर धनेश्वर महतो

 
Kasmar : 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध और 1999 में कारगिल की जंग लड़नेवाले बीएसएफ के सब इंस्पेक्टर धनेश्वर महतो का निधन बुधवार को उनके पैतृक गांव कसमार प्रखंड के हरनाद में हो गया. उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर में भी तीन महीने की कठिन ड्यूटी निभाकर देश की सेवा की थी. उनके निधन की खबर मिलते ही आसपास के क्षेत्र से ग्रामीणों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन करने उमड़ पड़ी. बुधवार शाम स्थानीय श्मशान घाट में देश के इस बहादुर जवान का अंतिम संस्कार किया गया. जिसमें हरनाद, सिंहपुर समेत आसपास के दर्जनों गणमान्य लोगों के अलावा पंचायत प्रतिनिधि मौजूद थे.

   करगिल जंग में दुश्मनों की गोली के हुए थे शिकार

बताया जाता है कि सियाचिन की तीन माह की ड्यूटी खत्म होने के तुरंत बाद कारगिल युद्ध का आगाज हुआ, जिसमें धनेश्वर महतो कारगिल युद्ध में शामिल हो गए. कारगिल युद्ध के दौरान ही जब वे दुश्मनों की गोली से घायल हुए तो उनकी तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद कई साल तक उनका इलाज़ बीएसएफ के अस्पताल में चला. जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो 2008 में उन्हें बीएसएफ की ओर से स्वैच्छिक सेवानिवृति दी गयी. इसके चार साल बाद 2012 में वे ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होकर अस्वस्थ हो गए. उनके अस्वस्थ होने के बाद उनके पुत्र समेत घर के सभी सदस्य पैतृक गांव कसमार प्रखंड के हरनाद आ गए. 2012 से लेकर अब तक लगातार 11 साल तक वे अस्वस्थ होकर बेड पर ही रहे. इस दरम्यान उनकी पत्नी बाला देवी, उनके पुत्र राजीव रंजन, पुत्री काजल कुमारी व रजनी कुमारी समेत घरवालों ने उनकी खूब सेवा की. यह">https://lagatar.in/nawadih-migrant-laborer-died-in-kolhapur-family-in-shock/">यह

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