करगिल जंग में दुश्मनों की गोली के हुए थे शिकार
बताया जाता है कि सियाचिन की तीन माह की ड्यूटी खत्म होने के तुरंत बाद कारगिल युद्ध का आगाज हुआ, जिसमें धनेश्वर महतो कारगिल युद्ध में शामिल हो गए. कारगिल युद्ध के दौरान ही जब वे दुश्मनों की गोली से घायल हुए तो उनकी तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद कई साल तक उनका इलाज़ बीएसएफ के अस्पताल में चला. जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो 2008 में उन्हें बीएसएफ की ओर से स्वैच्छिक सेवानिवृति दी गयी. इसके चार साल बाद 2012 में वे ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होकर अस्वस्थ हो गए. उनके अस्वस्थ होने के बाद उनके पुत्र समेत घर के सभी सदस्य पैतृक गांव कसमार प्रखंड के हरनाद आ गए. 2012 से लेकर अब तक लगातार 11 साल तक वे अस्वस्थ होकर बेड पर ही रहे. इस दरम्यान उनकी पत्नी बाला देवी, उनके पुत्र राजीव रंजन, पुत्री काजल कुमारी व रजनी कुमारी समेत घरवालों ने उनकी खूब सेवा की. यह">https://lagatar.in/nawadih-migrant-laborer-died-in-kolhapur-family-in-shock/">यहभी पढ़ें : नावाडीह : प्रवासी मजदूर की कोल्हापुर में हुई मौत, सदमें में परिवार [wpse_comments_template]

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