Search

केरल हाईकोर्ट ने महाभारत के कर्ण का जिक्र कर कहा, अविवाहित मां का बच्चा भी देश का नागरिक....

Thiruvananthapuram : अविवाहित मां का बच्चा भी हमारे देश का नागरिक है कोई भी उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता. केरल हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह बात कही है. इस क्रम में हाईकोर्ट ने कहा कि किसी इंसान को अपने आईडेंटिटी डॉक्यूमेंट्स में पिता का नाम नहीं लिखने का पूरा अधिकार है. जान लें कि कोर्ट ने यह आदेश अविवाहित माताओं और रेप विक्टिम्स के बच्चों के होने वाली परेशानियों को देखते हुए सुनाया. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पैरेंट्स के रूप में केवल मां के नाम वाला सर्टिफिकेट जारी किया जाये. इसे भी पढ़ें : विकास">https://lagatar.in/if-development-has-taken-place-then-why-are-people-dying-of-hunger-subramanian-swamy-slams-modi-government-on-supreme-courts-remarks/">विकास

हुआ है तो फिर लोग भूख से क्यों मर रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार को घेरा

हम एक ऐसा समाज चाहते हैं जिसमें कर्ण न हों

सुनवाई के क्रम में जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने महाभारत के कर्ण का जिक्र करते हुए कहा, हम एक ऐसा समाज चाहते हैं जिसमें कर्ण न हों, जो अपने जीवन को कोसते हैं. अपने माता-पिता का नाम नहीं जानने के लिए उन्हें अपमान का सामना करना पड़े. कर्ण का संदर्भ रखते हुए कोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट से पिता का नाम हटाने और पैरेंट्स के रूप में सिर्फ मां के नाम वाला सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया. इसे भी पढ़ें : देश">https://lagatar.in/the-security-of-the-country-and-the-future-of-the-youth-are-both-in-danger-tweeted-rahul-gandhi-on-the-agneepath-scheme/">देश

की सुरक्षा और युवाओं का भविष्य दोनों खतरे में, अग्निपथ योजना पर राहुल गांधी ने ट्वीट किया

अविवाहित मां के बच्चे के  मौलिक अधिकार का उल्लंघन कोई नहीं कर सकता

कोर्ट का कहना था कि अविवाहित मां का बच्चा भी हमारे देश का नागरिक है और कोई भी उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता. कहा कि इन अधिकारों की गारंटी हमारे संविधान में दी गयी है, वह बच्चा केवल अविवाहित मां का ही नहीं बल्कि इस महान देश भारत की भी संतान है. उसकी निजता, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार को कोई भी अथॉरिटी कम नहीं कर सकती है, कोर्ट ने जोर दिया कि अगर ऐसा होता है तो कोर्ट उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आयेगा. जस्टिस कुन्हीकृष्णन का कहना था ऐसे किसी व्यक्ति की मानसिक पीड़ा की कल्पना ठीक उसी तरह करनी चाहिए, जैसे कोई आपकी निजता में दखल देता है. कहा कि हालांकि कुछ मामलों में य जानबूझकर किया जाता है, जबकि कुछ में यह गलती से हो सकता है, लेकिन राज्य को नागरिकों की सभी प्रकार के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए, नहीं तो उन्हें अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा.

सिंगल पैरेंट का नाम बर्थ रिकॉर्ड में लिखा जायेगा सुप्रीम कोर्ट

भारत सरकार के एबीसी बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली) केस के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी मुख्य रजिस्ट्रार ऑफ बर्थ एंड डेथ्स को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि सिंगल पैरेंट का नाम बर्थ रिकॉर्ड में लिखा जायेगा. कह है कि स्पेशल डिमांड पर दूसरे पैरेंट के नाम का कॉलम छोड़ दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बर्थ सर्टिफिकेट, आईडेंटिटी कार्ड और अन्य दस्तावेजों में अकेले मां का नाम शामिल करना उसका अधिकार है. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp