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2004 से आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा बोर्ड
झारखंड राज्य खादी बोर्ड 2004 से ही आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा है. मानदेय पर रखे गये ये कर्मचारी खादी बोर्ड मुख्यालय के अलावा राज्य के खादी उत्पादन केंद्र, प्रशिक्षण केंद्रों और आउटलेट्स में रखे गये हैं. वहीं आउटसोर्स कर्मियों में भी कई चीजों को लेकर असंतोष है. वे कहते हैं कि बोर्ड ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे रखी है, लेकिन उस मुताबिक मानदेय नहीं मिल रहा है. आउटसोर्स कर्मियों को 20 से 30 हजार रुपये मानदेय मिल रहे हैं, लेकिन पिछले 16 महीने में मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसे भी पढ़ें - ‘भाभीजी">https://lagatar.in/malkhan-of-bhabhiji-ghar-par-hain-passes-away-dipesh-bhan-died-while-playing-cricket/">‘भाभीजीघर पर हैं’ के मलखान का 41 साल की उम्र में निधन, क्रिकेट खेलते समय दीपेश भान की गयी जान
रिटायरमेंट के बाद भी कुर्सियों पर जमे कर्मचारी
पूरी तरह से आउटसोर्स कर्मियों पर निर्भर होने की वजह से खादी बोर्ड में कई गड़बड़ियां सामने आयी. नेपोटिज्म चरम पर पहुंच गया. कई कर्मियों ने पैरवी कर अपने रिश्तेदारों की नौकरी खादी बोर्ड में लगवा दी. वहीं रिटायरमेंट के बाद भी 6 कर्मचारी 75-80 साल की उम्र में भी लंबे समय तक कुर्सियों पर जमे रहे. उद्योग विभाग से कई बार आदेश जारी होने के बाद उन रिटायर्ड कर्मियों को हाल ही में हटाया गया. इसे भी पढ़ें - चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-construction-of-medical-college-and-hospital-building-to-be-completed-this-year-so-far-only-8-work/">चाईबासा: इस वर्ष पूरा होना है मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के भवन का निर्माण, अभी तक सिर्फ 8% काम [wpse_comments_template]

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