Search

84 आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा खादी बोर्ड, सिर्फ 5 सरकारी कर्मी

Ranchi : झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा है. बोर्ड के पास सीईओ समेत सिर्फ 5 सरकारी कर्मी हैं, जबकि 84 आउटसोर्स कर्मी और 3 डेली वेजेज वाले कर्मी हैं. जो 5 सरकारी कर्मचारी हैं उनमें से भी कुछ जल्द रिटायर होने वाले हैं. बोर्ड के सीईओ राखाल चंद्र बेसरा ने उद्योग विभाग को कर्मियों की नियुक्ति के लिए उद्योग विभाग को पत्र भेजा है. 2004 में खादी बोर्ड का गठन हुआ था. संयुक्त बिहार के झारखंड बोर्ड के अलग होने के बाद बोर्ड में स्वीकृत पदों का बंटवारा हुआ था. झारखंड मुख्यालय में तैनात 13 कर्मी बोर्ड को मिले थे. धीरे-धीरे सभी सरकारी कर्मी रियाटर करते गये और आखिरकार सिर्फ 5 ही लोग बचे. वहीं 2019 के बाद से खादी बोर्ड के अध्यक्ष का भी पद खाली है. अध्यक्ष नहीं होने की वजह से बोर्ड कई नीतिगत फैसले नहीं ले पा रहा है. पढ़ें - भाजपा">https://lagatar.in/bjp-released-old-video-of-mamta-partha-chatterjee-and-arpita-mukherjee-asked-what-is-this-relationship-called/">भाजपा

ने ममता, पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी का पुराना वीडियो जारी किया, पूछा, यह रिश्ता क्या कहलाता है?
इसे भी पढ़ें - लातेहार">https://lagatar.in/latehar-five-militants-including-ganjhu-ordered-by-tpc-organization-arrested-8303-rounds-of-bullets-30-hand-grenades-recovered/">लातेहार

: TPC का कमांडर आदेश गंझू गिरफ्तार, 8303 राउंड गोली, 30 हैंड ग्रेनेड बरामद

2004 से आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा बोर्ड

झारखंड राज्य खादी बोर्ड 2004 से ही आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा है. मानदेय पर रखे गये ये कर्मचारी खादी बोर्ड मुख्यालय के अलावा राज्य के खादी उत्पादन केंद्र, प्रशिक्षण केंद्रों और आउटलेट्स में रखे गये हैं. वहीं आउटसोर्स कर्मियों में भी कई चीजों को लेकर असंतोष है. वे कहते हैं कि बोर्ड ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे रखी है, लेकिन उस मुताबिक मानदेय नहीं मिल रहा है. आउटसोर्स कर्मियों को 20 से 30 हजार रुपये मानदेय मिल रहे हैं, लेकिन पिछले 16 महीने में मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसे भी पढ़ें - ‘भाभीजी">https://lagatar.in/malkhan-of-bhabhiji-ghar-par-hain-passes-away-dipesh-bhan-died-while-playing-cricket/">‘भाभीजी

घर पर हैं’ के मलखान का 41 साल की उम्र में निधन, क्रिकेट खेलते समय दीपेश भान की गयी जान

रिटायरमेंट के बाद भी कुर्सियों पर जमे कर्मचारी

पूरी तरह से आउटसोर्स कर्मियों पर निर्भर होने की वजह से खादी बोर्ड में कई गड़बड़ियां सामने आयी. नेपोटिज्म चरम पर पहुंच गया. कई कर्मियों ने पैरवी कर अपने रिश्तेदारों की नौकरी खादी बोर्ड में लगवा दी. वहीं रिटायरमेंट के बाद भी 6 कर्मचारी 75-80 साल की उम्र में भी लंबे समय तक कुर्सियों पर जमे रहे. उद्योग विभाग से कई बार आदेश जारी होने के बाद उन रिटायर्ड कर्मियों को हाल ही में हटाया गया. इसे भी पढ़ें - चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-construction-of-medical-college-and-hospital-building-to-be-completed-this-year-so-far-only-8-work/">चाईबासा

: इस वर्ष पूरा होना है मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के भवन का निर्माण, अभी तक सिर्फ 8% काम [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp