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प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले खड़गे, धनखड़ सरकार की शान में कसीदे पढ़ते हैं, खुद को आरएसएस का एकलव्य बताते हैं

NewDelhi : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने के संबंध में विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेताऔं ने आज बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जगदीप धनखड़ पर हमलावर हुए. देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए खड़गे ने सभापति(धनखड़) पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया. श्री खड़गे ने अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया, इसकी वजह भी बताई.

हमें पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण दुख के साथ अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ रहा है

खड़गे ने उपराष्ट्रपति पद को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ करार देते हुए कहा, इस कुर्सी पर कई महत्वपूर्ण लोग बैठे हैं और बहुत काम किया है. लेकिन इतने लंबे कालखंड में किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया, क्योंकि किसी ने पक्षपात नहीं किया. लेकिन आज हमें पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण दुख के साथ अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ रहा है. खड़गे ने आरोप लगाया कि नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है.

प्रथम उपराष्ट्रपति ने 1952 में कहा था, वह किसी भी पार्टी से नहीं हैं

खड़गे ने देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया. कहा कि प्रथम उपराष्ट्रपति ने 1952 में कहा था कि वह किसी भी पार्टी से नहीं हैं. इसका मतलब यह कि वह कह रहे हैं कि वे किसी पार्टी से नहीं आते और हर पार्टी से आते हैं जो उनकी निष्पक्षता दर्शाता है. उन्होंने कहा कि हमें दुख के साथ यह प्रस्ताव(अविश्वास) जगदीप धनखड़ के खिलाफ लाना पड़ रहा है. वह विपक्ष के सदस्यों की हेडमास्टर की तरह स्कूलिंग करने लगते हैं. खड़गे ने कहा कि जगदीप धनखड़ कभी सरकार की शान में कसीदे पढ़ने लगते हैं, कभी खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एकलव्य बताते हैं. आरोप लगाया कि सभापति सीनियर-जूनियर का भी खयाल नहीं रखते. विपक्षी नेताओं के लिए राजनीतिक बयानबाजियां करते हैं.

सभापति भाजपा प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

सभापति नहीं चाहते कि सदन में चर्चा हो. वह विपक्ष के नेताओं को बोलने से रोकते हैं. प्रवचन देने लगते हैं. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सभापति भाजपा प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं. आरोप लगाया कि राज्यसभा में सबसे बड़े व्यवधान डालने वाले खुद चेयरमैन हैं. वह हमेशा सदन को ठप करने की कोशिश करते हैं. सभापति सर्वाधिक व्यवधान डालते हैं. हम अगर एक सवाल भी पूछ लें तो सभापति सरकार का पक्ष लेते हैं.

संजय राउत ने कहा, वे सदन नहीं, सर्कस चलाते हैं

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सभापति पर हमलावर होते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत नहीं, व्यवस्था की लड़ाई है. सभापति सदन शुरू होने पर 40 मिनट पहले खुद भाषण देते हैं और उसके बाद कहते हैं दंगा करो. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सभापति सदन नहीं चलाते, सर्कस चलाते हैं. सभापति संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं की अवहेलना करते हैं.

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