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खरगे ने मोदी सरकार पर निशाना साधा, कहा-‘बेटी बचाओ’ नहीं ‘बेटी को बराबरी का हक’ सुनिश्चित करो

 
  • खरगे का मोदी सरकार पर हमला, महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नहीं उठाये ठोस कदम
NewDelhi :   कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. खरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार महिलाओं की सुरक्षा पर बात कर चुके हैं. लेकिन उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में ऐसा कुछ ठोस नहीं किया, जिससे आधी आबादी के खिलाफ अपराधों पर अकुंश लगे. खरगे ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में लिखा कि हमारी महिलाओं के साथ हुआ कोई भी अन्याय असहनीय है, पीड़ादायक है और घोर निंदनीय है. हमें ‘बेटी बचाओ’ नहीं ‘बेटी को बराबरी का हक सुनिश्चित करो’ चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं को संरक्षण नहीं, भयमुक्त वातावरण चाहिए. https://twitter.com/kharge/status/1829031054860050662

बीजेपी ने अपराधों की रोकथाम के लिए कुछ नहीं किया, उल्ट पीड़ित का चरित्र हनन किया

खरगे ने दावा किया कि देश में हर घंटे महिलाओं के खिलाफ 43 अपराध रिकॉर्ड होते हैं. हर दिन 22 अपराध ऐसे हैं, जो हमारे देश के सबसे कमजोर दलित-आदिवासी वर्ग की महिलाओं व बच्चों के खिलाफ दर्ज होते हैं. वहीं डर, भय और सामाजिक कारणों के चलते ऐसे अनगिनत अपराध हैं, जो दर्ज ही नहीं होते हैं.  उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से दिये गये अपने भाषणों में कई बार महिला सुरक्षा पर बात कर चुके हैं, पर उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में ऐसा कुछ ठोस नहीं किया, जिससे महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम हो.  उल्टा, उनकी पार्टी ने कई बार पीड़ित का चरित्र हनन भी किया है, जो शर्मनाक है.

“बेटी बचाओ” पेंट करवाने से क्या सामाजिक बदलाव आयेगा या सरकारें व कानून व्यवस्था सक्षम बनेंगी?

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि हर दीवार पर “बेटी बचाओ” पेंट करवा देने से क्या सामाजिक बदलाव आयेगा या सरकारें और कानून व्यवस्था सक्षम बनेंगी? आगे कहा कि क्या हम ऐहतियाती कदम उठा पा रहे हैं? क्या हमारा आपराधिक न्याय तंत्र सुधरा है? क्या समाज के शोषित व वंचित अब एक सुरक्षित वातावरण में रह पा रहे हैं? " खरगे ने यह सवाल भी किया कि क्या सरकार और प्रशासन ने वारदात को छिपाने का काम नहीं किया है? क्या पुलिस ने सच्चाई छिपाने के लिए पीड़िताओं का अंतिम संस्कार जबरन करना बंद कर दिया है? निर्भया कांड का हवाला देकर कहा कि जब 2012 में दिल्ली में “निर्भया” के साथ वारदात हुई तो न्यायमूर्ति वर्मा कमेटी ने ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सिफारिशें दी थीं. आज क्या उन सिफारिशों को हम पूर्णतः लागू कर पा रहे हैं? " उन्होंने कहा कि संविधान ने महिलाओं को बराबरी का स्थान दिया है. महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर मुद्दा है. इन अपराधों को रोकना देश के लिए एक बड़ी चुनौती है. हम सबको एकजुट होकर, समाज के हर तबके को साथ लेकर इसके उपाय तलाशने होंगे. खरगे ने जोर देते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है, जब हर वह कदम उठाया जाये, जिससे महिलाओं के लिए भययुक्त वातावरण सुनिश्चित हो सके. [wpse_comments_template]
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