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खरसावां : विधायक दशरथ से मिला गौड़ सेवा संघ का प्रतिनिधिमंडल

Kharsawan : गौड़ सेवा संघ का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को खरसावां विधायक दशरथ गागराई से मिल कर तीन सूत्री ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन सौंपने वालों में गौड़ सेवा संघ के केंद्रीय सचिव बलराम प्रधान, सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप प्रधान, विरेंद्र प्रधान, नील माधव प्रधान, अजीत प्रधान, विवेका प्रधान आदि शामिल हैं. ज्ञापन में गौड़ समाज की उपजाति की खतियान में कागजी विसंगती को दूर कर ओबीसी-एक का प्रमाण पत्र निर्गत कराने के हेतु उचित पहल करने की मांग की गयी है. ज्ञापन में कहा गया है कि कोल्हान में बड़ी संख्या में ओड़िया भाषी व गौड़ समाज के लोग निवास कर रहे है, जो यहां के मूल अधिवासी है. ज्ञापन में कहा गया है कि कोल्हान प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले ओड़िया भाषा-भाषी प्रधान जाति में गौड़, ग्वाला, गोप, महाकुड़, गोपाड़ गिरी, बारिक, तेहरा उपजाति है. ये सभी एक ही जाति ग्वाला ही है, जो ओबीसी-एक की श्रेणी में आते है. परंतु किसी-किसी गांव के मूल खतियान में उपजाति विभिन्न प्रकार के दर्ज है. इस कागजी विसंगती के कारण ओबीसी-एक का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है. इस कागजी विसंगती को दूर कर ओबीसी-एक का प्रमाण पत्र निर्गत कराने के हेतु उचित पहल करने की मांग की गयी. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-when-the-matter-of-the-death-of-300-tribals-was-taken-up-the-government-sent-them-to-jail-dhullu-mahato/">धनबाद

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प्राशिप्र पाठ्यक्रम के सातवें पत्र में ओड़िया भाषा को शामिल करने मांग

गौड़ सेवा संघ की ओर से विधायक को सौंपे गये ज्ञापन में राज्य सरकार से ओड़िया भाषियों के हितों की रक्षा करने की गुहार लगाया गया है. ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची के विज्ञप्ति संख्या 02/ 2023 में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र 2016-18, 2017-19, 2018-20, 2019-21 व 2020-22 के परीक्षा कार्यक्रम के सप्तम पत्र में ओड़िया भाषा का विकल्प नहीं है. यह कहीं से भी न्याय संगत नहीं है. प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के सातवें पत्र में ओड़िया भाषा को शामिल करने की गयी है. ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 29 व 30 में बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार दिया गया है. परंतु कोल्हान के ओड़िया भाषी गांवों के स्कूलों में ओड़िया भाषी शिक्षक व पाठ्य पुस्तकों की कमी के कारण बच्चे अपने मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने से वंचित हो रहे है. ओड़िया भाषी शिक्षक व ओड़िया पाठ्य पुस्तकों की कमी को दूर करने की मांग की गयी. [wpse_comments_template]

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