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खरसावां : हरिभंजा में श्रद्धा व उत्साह के साथ निकली प्रभु जगन्नाथ की बाहुड़ा रथ यात्रा

Kharsawan : जय जगन्नाथ व हरि बोल के उदघोष के बीच प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर पहुंचे. शनिवार को बाहुड़ा रथ यात्रा के दिन दोपहर को गुंडिचा मंदिर में प्रभु जगन्नाथ बलभद्र व देवी सुभद्रा की मध्याह्न आरती उतारने के साथ-साथ खीर-खिचड़ी का भोग लगाया गया. शाम करीब चार बजे फिर एक बार प्रसाद चढ़ाने व आरती उतारने के बाद महाप्रभु की बाहुड़ा रथ यात्रा निकली. प्रभु जगन्नाथ के रथ ‘नंदिघोष’ को खींचने के लिये शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/Kharsawan-Bahuda-1-360x504.jpg"

alt="" width="360" height="504" /> इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-four-youths-injured-in-two-motorcycle-accidents/">किरीबुरु

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महाप्रभु को अर्पित की गई ‘छप्पन भोग’, निभायी गई ‘अधरपोणा’ की रस्म

ओड़िशा के पुरी की तर्ज पर खरसावां के हरिभंजा में शनिवार की शाम भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथ यात्रा (वापसी रथ यात्रा) निकाली गयी. हरिभंजा में बाहुड़ा रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ को छप्पन भोग अर्पित की गयी. जानकारी के अनुसार शाम करीब पांच बजे हरिभंजा के गुंडिचा मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन की आरती उतारी गयी. फिर ‘पोड़ पिठा’ व ‘छेना पोड़ा’ को भोग लगाया गया. इसके पश्चात सेवायतों द्वारा चतुर्था मूर्ति को रथारुढ़ कराते हुए भक्त प्रभु जगन्नाथ के रथ को खींच कर मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचा गया. गुंडिचा मंदिर से वापस श्री मंदिर पहुंचने पर अधरपणा, छप्पन भोग समेत अन्य रश्म भी निभाये गये. प्रभु को 56 प्रकार के मिष्टान्न भोग लगाये गये. प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के श्री मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक शंखध्वनि व हुल-हुली के साथ स्वागत किया गया. [wpse_comments_template]

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