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खांटी बिहारी, जिन्हें लोग कहते थे कोयलांचल का गांधी

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Neeraj Kumar Dhanbad : महावीर प्रसाद महतो महात्मा गांधी से प्रेरित थे. सादा जीवन-उच्च विचार. स्कूली दिनों से ही जंगे आजादी में बढ-चढ़कर भाग लेने लगे. बाद में महात्मा गांधी की तरह एक धोती धारण करना शुरू किया. लोग उन्हें `कोयलांचल का गांधी` कहते. लोग कहते -इनका एक पैर जेल में रहता है. यानी आंदोलनों के कारण वे बार-बार जेल गए. भागलपुर केंद्रीय कारा में जगजीवन राम, अनुग्रह नारायण सिंह, भोला पासवान शास्त्री जैसे दिग्गज स्वतंत्रता सेनानियों का साथ मिला. स्वतंत्रता मिलने के बाद अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संघ के उपाध्यक्ष के साथ राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कई संगठनों में विभिन्न पदों पर रहे. उनके द्वारा गोविंदपुर के पास गोसाईडीह में स्थापित किए गए कस्तूरबा गांधी आश्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जगजीवन राम, अनुग्रह नारायण सिंह, जयप्रकाश नारायण जैसे स्वतंत्रता सेनानी पहुंचे. यह आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन के लिए कोयलांचल क्षेत्र का बड़ा केंद्र बना.

1945 में धनबाद को बनाया ठिकाना फिर यहीं के होकर रह गए

स्वतंत्रता सेनानी महावीर प्रसाद महतो धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड के गोसाईडीह गांव में 7 नवंबर 1945 को आए थे. फिर यहीं के होकर रह गए. क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उच्च बुनियादी विद्यालय, बालिकाओं के लिए प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय से लेकर आरएस मोर कॉलेज तक की स्थापना की. इसके पूर्व महात्मा गांधी से प्रेरित होकर कस्तूरबा गांधी आश्रम की नींव रखी. आश्रम ने क्षेत्र की गरीब जनता, आदिवासियों की पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य से लेकर रोजगार संबंधित अनेक कार्य किए. .

रोगियों की सेवा का व्रत

गोविंदपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रमोद रंजन कुमार बताते हैं कि महावीर प्रसाद महतो ने ग्रामीणों  के इलाज के लिए जागरूकता अभियान चलाया था. वे घूम-घूम कर लोगों को झाड़-फूंक से बचने की सलाह देते थे. साथ ही ग्रामीणों की हमेशा सुध लेते थे. रोगी का पता चलने पर स्वयं उनके घर जाकर उसके इलाज व दवा का प्रबंध करते थे. इस कारण अधिकतर ग्रामीण उन्हें डॉक्टर समझते थे. सरायढेला में महावीर गैस एजेंसी के संचालक, महावीर प्रसाद महतो के मंझले पुत्र देवनारायण महतो ने बताया कि उनके पिता का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के जयनगर में 23 फरवरी 1923 को हुआ था. स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेते हुए वे 7 नवंबर 1945 को धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड आए. यहां उन्होंने कस्तूरबा गांधी आश्रम की नींव रखी. यहीं से उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को कोयलांचल में फैलाया. 15 अगस्त 1972 को राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. उनके तीन पुत्र तथा दो पुत्रियां हैं. यह भी पढ़ें : अभया">https://lagatar.in/dhanbad-allegation-of-irregularity-in-teacher-reinstatement-in-abhaya-sundari-middle-school-complaint-to-dc/">अभया

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