: खतियान आधारित ऑनलाइन जाति प्रमाण पत्र बनाने में हो रही समस्याओं को लेकर बैठक आयोजित
पांचवीं अनुसूची में भी आदिवासियों के हित की बात
1932 के खतियान को संवैधानिक प्रावधान के प्रतिकूल बताने वालों पर भी कांग्रेसी नेता ने निशाना साधा. उन्होंने कहा, संविधान के स्थायी उपबंध ‘पांचवीं अनुसूची’ में अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक भाषा के संरक्षण का प्रावधान है. लोकतंत्र में विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि 1932 की खतियान आधारित स्थानीय नीति झारखंड के लोगों की पहचान है. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि कोई भी भारतीय हर राज्य का स्थायी निवासी नहीं हो सकता.झारखंड में विस्थापन की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है
सुखदेव भगत ने कहा, देश के विकास में हर तरह की मदद पहुंचाने वाला झारखंड आज भी विस्थापन की समस्या से जूझ रहा है. भाजपा- आजसू की पिछली सरकार ने 21.01 लाख एकड़ (21,01,471) जमीन लैंड बैंक के नाम पर चिन्हित की, जो विस्थापन की प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाते रही. 1932 की खतियान आधारित स्थानीय नीति को लाकर ही झारखंडियों की जमीन और उसकी अस्मिता को बचाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें – राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhi-sticks-to-his-stand-said-in-kerala-he-will-not-become-congress-president/">राहुलगांधी अपने रुख पर कायम, केरल में कहा, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनेंगे, बोले, भारत जोड़ो यात्रा विचारों पर आधारित है… [wpse_comments_template]
















































































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