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खूंटी : नवीडीह गांव की नहीं बदल सकी सूरत व सीरत

  • 35 साल में आठ बार भाजपा के सांसद रहे, पर सुविधाओं से महरूम रहा नवीडीह गांव
Praveen Kumar Ranchi/Khunti :   खूंटी के एक गांव की सूरत और सीरत आज तक नहीं बदल पायी है. पिछले 35 साल से आठ बार यहां से भाजपा के सांसद चुने गये, लेकिन  खूंटी के नवाडीह गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. चार बार चुने गये भाजपा विधायक और भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद पर रहे जनप्रतिनिधि भी मुंडा दिशुम के गांव के विकास का शिल्पकार सबित नही हुए. मुंडा दिशुम में आज भी जल, जंगल, जमीन का मुद्दा अहम है. इसको लेकर ग्रामीण कहते हैं कि जो चुनाव लड़ रहे हैं, वह कभी भी ग्रामीणों के साथ इन मुद्दे पर खड़ा नहीं हुए हैं. बिरसा मुंडा के नाम से खूंटी की बनी पहचान अब अफीम की खेती के लिए जानी जा रही है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/05/Untitled-6-7.jpg"

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तिलमा पंचायत में नहीं बनी पक्की सड़क

नावाडीह गांव की दूरी खूंटी जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर है. तिलम पंचायत में नवाडीह खूंटकट्टी गांव पड़ता है, जहां करीब 75 खूंटकटीदार मुंडा परिवार रहते हैं. एक दो घरों को छोड़ बाकी सभी कच्चे मकान हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना, इंदिरा आवास और अबुआ आवास की झलक गांव में नहीं दिखती. ग्रामीण कहते हैं कि हमलोग आंख बंद कर के भाजपा विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा का सपोर्ट करते थे. उनके शादी में भी ग्रामीणों ने चंदा कर दो खस्सी उपहार में दिया था. लेकिन 20 साल से विधायक रहने के बाद भी गांव का विकास नहीं किया गया. अर्जुन मुंडा को भी वोट देकर 2019 में जिताया, लेकिन उन्होंने भी गांव के विकास का ख्याल नहीं रखा.

क्या कहते हैं ग्रामीण

जल-नल योजना में की खानपूर्ति : हातु मुंडा

समुयेल मुंडा (हातु मुंडा) कहते हैं कि गांव में पीने की पानी की समस्या है. नल-जल योजना से गांव में बनी जल मीनार बनी है, लेकिन ठेकेदार नें मानमाने तरीके से काम किया है. घरों तक पाइप तो बिछा दिया, लेकिन नल नहीं लगाया. दिन में एक बार पानी चलता जाता है, लेकिन नल नहीं होने के कारण सब बेकार हो जाता है.

आधी से अधिक जमीन गायब हो गयी : परता

परता मुंडा कहते हैं कि हमारी खुदकटी जमीन ऑनलाइन में देखने पर आधी ही दिखती है. सरकार ने जमीन के दस्तावेज को ऑनलाइन कर रखा है, जिसमें हमारी आधी से अधिक जमीन गायब है. गांव में जमीन की को लेकर कई समस्याएं है. हमारी रसीद नहीं कट रही है. हमारी जमीन कहां गई, इसकी चिंता किसी जनप्रतिनिधि को नहीं है.

गर्भवती महिलाओं को अस्पताल जाने में होती है परेशानी

ग्रामीण कहते हैं कि गांव को पक्की सड़क से नहीं जोड़ा गाया है. आजादी के 76 साल बाद करीब दो किलोमीटर तक सड़क कभी बना ही नहीं. गर्भवती महिलाओं और रोगियों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है. साथ ही मजदूरी के लिए खूंटी और रांची जाने वाले सड़क कच्ची है. इसके कारण अवाजाही में समस्या होती है.

सांसद बनने के बाद गायब रहे अर्जुन मुंडा

झारखंड में खूंटी लोकसभा सीट पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. मोदी कैबिनेट में जनजातीय मामलों के मंत्री और तीन बार झारखंड के सीएम रह चुके अर्जुन मुंडा का कांग्रेस के कालीचरण मुंडा से सीधा मुकबला है. इस लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में कहा जा रहा है कि सांसद बनने के बाद अर्जुन मुंडा गायब ही रहे. 2019 के पहले तक यहां से भाजपा के वयोवृद्ध नेता और लोकसभा के पूर्व उपसभापति कड़िया मुंडा चुनाव जीतते रहे थे. 1989 से कड़िया मुंडा भाजपा के टिकट से सात बार चुनाव जीत चुके है. वहीं, 2019 में अर्जुन मुंडा यहां से जीते, खूंटी विधानसभा से पिछले 20 सालों से भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा विधायक हैं. [wpse_comments_template]

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