- अब तक बेहतर चिकित्सा, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व रोजगार क्यों नहीं मिला?
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डीएमएफटी फंड से अधिकारियों व ठेकेदारों को ही हुआ फायदा
सारंडा में डीएमएफटी फंड से अब तक जो विकास योजनाएं प्रारम्भ की गई हैं वह आज तक पूर्ण नहीं हो पाई है. उसमें भी मनमाना प्राक्कलन बना ठेकेदारों व अधिकारियों को लाभ पहुंचाने का ही कार्य किया गया है. डीएमएफटी फंड अधिकारियों व ठेकेदारों के लिये कुबेर का खजाना जैसा हो गया है. गौरतलब हो कि सेल की किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुवा, चिड़िया एवं टाटा स्टील की विजय-टू खदान प्रबंधन हर वर्ष लगभग ढाई-तीन सौ करोड़ रुपये डीएमएफटी फंड में दे रही है. इसके अलावे सारंडा की अन्य प्राईवेट कंपनियां भी अपना-अपना पैसा डीएमएफटी फंड में वर्ष 2011-12 से जमा कराते आयी थी. लेकिन, किसी पार्टी के नेता ने डीएमएफटी फंड से विकास की बातें नहीं की. न ही इस पर कोई सवाल उठाया. इन सबका खामिया जाता राजनीतिक दल के नेताओं को भुगतना पड़ेगा. ग्रामीण हर एक मुद्दे पर नेताओं से सवाल करने के लिए तैयार हैं. खदान से प्रभावित गांवों समेत सारंडा के तमाम गांवों का सर्वांगीण विकास करना है, लेकिन सारंडा की सच्चाई यह है कि यहां के लोगों को पीने के लिये शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, चिकित्सा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बिजली, यातायात, संचार, रोजगार, शौचालय आदि की कोई भी सुविधा नहीं है. सभी ग्रामीणों को अब तक शौचालय की सुविधा नहीं मिली है. अब भी अधिकांश ग्रामीण खुले में शौच करते हैं. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-maa-ambe-youth-sporting-club-will-perform-kali-puja-with-pomp/">Adityapur: मां अम्बे यूथ स्पोर्टिंग क्लब धूमधाम से करेगा काली पूजा [wpse_comments_template]
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