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किरीबुरु : बीएमएस एमओयू से श्रमिक विरोधी क्लॉज नहीं हटाने पर हस्ताक्षर नहीं करेगा

Kiriburu : भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ का 16वां त्रैवार्षिक अधिवेशन 29 और 30 जनवरी को बैठक हुई. इसमें दुर्गापुर के माध्यम प्रस्ताव पारित किया गया कि जब तक 22 अक्टूबर 2021 को हुए एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडर स्टैंडिंग) में श्रमिक विरोधी क्लॉज को हटाया नहीं जाता है, तब तक भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के औद्योगिक इकाई इस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. वहीं श्रमिक हित में कुछ मुद्दों को जल्द हल किए बगैर भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधि एमओयू से सम्बन्धित विषय पर सब कमेटी में भागीदारी नहीं करेगा. यह बातें भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य सह इस्पात उद्योग के प्रभारी एवं एनजेसीएस सदस्य देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहीं. भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ ( भारतीय मजदूर संघ का स्टील फेडरेशन) के नव नियुक्त महामंत्री रंजय कुमार ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ का स्टील फेडरेशन निम्नलिखित क्लॉजेज और मुद्दों का जल्द समाधान चाहता है. उन्होंने मांग की कि वर्तमान पर्क्स 26.5 % किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है.  इसमे 1.5% की वृद्धि कर कुल 28% पर्क्स तय होनी चाहिए. इसके बकाया राशि का भुगतान हो. 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक के बीच का 39 महीने का एरियर का भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए. एनजेसीएस के समझौता के दायरे में आने वाले सभी कर्मियों को तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट सुनिश्चित हो और ओपेन एंड पे स्केल अपग्रेड होनी चाहिए. एनजेसीएस के समझौता के दायरे में आने वाले सभी कर्मियो को सब्सिडी जैसे कि शिक्षा, कैंटीन, आवास, बिजली, पानी पर मिलती ही रहनी चाहिए और कटौती के आदेश को वापस लेना चाहिए. ग्रेच्युटी सीलिंग के प्रावधानों को समाप्त कर स्वैच्छिक ऑप्शन रहना चाहिए. ऐसा नहीं होने से वरिष्ठ एवं सेवा मुक्त कर्मियों को लाखों का नुकसान होने की सम्भावना है. इसे भी पढ़ें : अखिलेश">https://lagatar.in/akhilesh-yadav-jayant-chaudharys-press-conference-saying-that-the-election-is-of-brotherhood-versus-bjp-rained-on-yogis-statement-that-calms-the-heat/">अखिलेश

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सेल में 58 माह विलंब से वेज रिवीजन होने का रिकॉर्ड

सेल में 58 माह विलंब वेज रिवीजन होने का रिकॉर्ड बनाया गया है. भारतीय मजदूर संघ 2016 से पांचवें सदस्य के रुप में एनजेसीएस में है. उस समय से सेल/आरआईएनएल के सभी कर्मचारी एनजेसीएस में बीएमएस की भागीदारी पर गहरी नजर बनाए हुए है और उसके अधिकारियों की तर्ज पर कर्मचारियों को भुगतान करने की मांग के साथ खड़े हैं. 58 माह विलंब होने के बाद वेज 10वें वेज बोर्ड में श्रमिक विरोधी काले समझौते (एमओयू) पर तीन यूनियनों ने 22 अक्टूबर 2021 को समझौता किया है. इस श्रमिक विरोधी समझौते ने सेल में कार्यरत 54000 और 17000 सेवानिवृत्त कर्मियों के भविष्य को प्रभावित किया है. इस समझौते में काफी अधिक भेदभाव किया गया है. जैसे 1 जनवरी 2017 से 20 मार्च 2020 तक के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मियों का 39 महीने का एरियर का भुगतान नहीं किया गया है. अधिकारियो को पर्क्स का एरियर मिला वहीं कर्मियो को नहीं दिया गया. सभी कर्मियो को 3% इंक्रिमेंट सुनीश्चित नहीं किया गया है. पर्क्स के नाम पर पहले से मिल रहे सभी सब्सिडी को वापस लिया गया है, जबकि अधिकारी वर्गों को 2007 से पर्क्स के साथ-साथ सब्सिडी का लाभ दिया गया है. यूनियनों की सहमति के बगैर ग्रेज्युटी को सिल्ड कर दिया गया है. एनजेसीएस मीटिंग के दौरान मैनेजमेंट ने अधिकारियों की तरह 15% एमजीबी और 35% पर्क्स देने में असमर्थता व्यक्त किया था, पर बीएमएस ने साफ किया था कि वह अपने डिमांड ऐट पार एक्जिक्युटीव से पिछे नही हटेगा. [wpse_comments_template]

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