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Kiriburu : मुख्यमंत्री जी, दूषित लाल पानी पीने के लिये क्या अलग राज्य की लड़ाई लड़ी थी? - ग्रामीण

Kiriburu (Shailesh Singh) : झारखंड सरकार व जिला प्रशासन बताये कि क्या ऐसा ही दूषित लाल पानी पिलाने के लिये अलग झारखंड राज्य बनाया गया था! अलग झारखंड राज्य हेतु हम ग्रामीणों ने भी लड़ाई लड़ी थी. हमारे पूर्वज व बीच के साथियों ने शहादत दी थी. यह कहना है सारंडा के छोटानागरा पंचायत अन्तर्गत राजाबेड़ा गांव के ग्रामीणों व महिलाओं का. उल्लेखनीय है कि राजाबेड़ा गांव सेल की गुवा खदान एवं टाटा स्टील की विजय-टू खदान से सटा हुआ है. सेल की गुवा खदान क्षेत्र स्थित रानी चुआं डम्प का बांध टूटने की वजह से खदान का लौहचूर्ण व लाल मिट्टी वर्षा का पानी की तेज बहाव में रानी चुआं नाला के रास्ते जोजोगुटु, राजाबेड़ा, जामकुंडिया आदि गांवों के बगल से गुजरने वाली कोयना नदी में मिलकर इस नदी का पानी को पूरी तरह से लाल व प्रदूषित कर रही है. टाटा स्टील की विजय-टू खदान का चेकडैम भी बीते वर्षों टूट गया था, जिससे लाखों टन फाइन्स बह गया था. वर्षा होने पर बहा फाइन्स व खदान का लाल मिट्टी बहकर विभिन्न प्राकृतिक नालों के माध्यम से तितलीघाट गांव के समीप कोयना नदी के पानी को लाल कर देती है. दोनों खदानों की लाल मिट्टी व लौह चूर्ण बहकर आने से नदी का पानी खूनी रंग में रंग जाता है. इसे भी पढ़ें : Kiriburu">https://lagatar.in/kiriburu-women-of-bolani-took-out-a-candle-march/">Kiriburu

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जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है

[caption id="attachment_936591" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/08/Kiriburu-Payjal-1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> राजाबेड़ा गांव के समीप कोयना नदी किनारे बना चुआं व बर्तन साफ करती महिलाएं.[/caption] दूसरी तरफ राजाबेड़ा गांव के ग्रामीण इस कोयना नदी का पानी का इस्तेमाल ही पेयजल, खाना बनाने, नहाने, बर्तन व कपड़ा साफ करने के रुप में करते हैं. इनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है. नदी किनारे चुआं बनाकर उस चुआं से थोड़ा साफ पानी डेगची में भरकर ले जाते व उसे पीते तथा खाना बनाते हैं. सरकार ने बाईहातु गांव स्थित आसन्न जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन बिछाकर राजाबेड़ा गांव के तमाम घरों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति की योजना बनायी थी. गांव में पानी पाइप लाइन व नल भी लगा, लेकिन ग्रामीणों को आज तक एक बूंद भी पानी इस योजना से नहीं मिला. यह योजना भारी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-bharat-bandh-supporters-blocked-toll-bridge/">Adityapur

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राजस्व गांव का अभी तक नहीं हुआ विकास

राजाबेड़ा गांव के मुंडा जामदेव चाम्पिया ने कहा कि सरकार व प्रशासन हम ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है, जो दुर्भाग्य की बात है. सेल व टाटा स्टील सरकार को प्रतिवर्ष डीएमएफटी फंड के रुप में सैकड़ों करोड़ रुपये खदानों से प्रभावित गांवों का विकास हेतु दे रही है. लेकिन हमारा राजस्व गांव का अब तक कोई विकास नहीं हुआ. सिर्फ दोनों खदानें हम ग्रामीणों को निरंतर बीमारी देने का कार्य कर रही है. यहां तक कि बरसात में राजाबेड़ा गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो जाता है. गांव में जाने हेतु एक नाला पर पुल निर्माण हो रहा था, लेकिन वह भी पिछले डेढ़ वर्षों से अधूरा पड़ा है. एक बार मुख्यमंत्री से लेकर उपायुक्त तक अथवा दोनों खदानों के उच्च अधिकारी ऐसा दूषित लाल पानी पीकर दिखा दें, फिर हम उसके बाद सरकार व प्रशासन से कुछ भी मांग नहीं करेंगे. [wpse_comments_template]

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