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किरीबुरू : कभी नक्सलियों का गढ़ रहा सारंडा के टोयबो गांव में एनआरबीसी स्कूल के जरिये शिक्षित हो रहे बच्चे

Kiriburu (Shailesh Singh) : झारखण्ड-ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में बेहतर कार्य कर रही गैर-सरकारी संस्था एस्पायर ने मनोहरपुर प्रखंड के दीघा पंचायत अन्तर्गत इन्क्रोचमेंट गांव टोयबो में एनआरबीसी स्कूल खोला है. यह झोपड़ीनुमा स्कूल का निर्माण टोयबो एंव नुरदा गांव के ग्रामीणों ने एस्पायर के पहल पर अपने बच्चों का बेहतर भविष्य व शिक्षित करने के उद्देश्य से किया है. इस स्कूल को एक माह पूर्व एस्पायर द्वारा खोला गया है. इसमें दोनों गांवों के 29-29 बच्चों का नामांकन किया गया है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-demand-to-give-unemployment-allowance-to-shopkeepers-removed-from-sakchi-patta-line/">जमशेदपुर

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शिक्षा से वंचित बच्चों को दी जा रही निःशुल्क शिक्षा

[caption id="attachment_415263" align="aligncenter" width="543"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/kiriburu-3.jpeg"

alt="" width="543" height="362" /> एनआरबीसी स्कूल में पढ़ते बच्चे एंव मौजूद नीति आयोग के पदाधिकारी[/caption] ऐसे तो एस्पायर के नियमों अनुसार एनआरबीसी में 9 से 14 वर्ष के बच्चों का हीं नामांकन लिया जाता है. लेकिन इस क्षेत्र में कोई मुलभुत सुविधा नहीं होने की वजह से अपने नियमों में बदलाव कर इसमें 6 वर्ष की उम्र वाले बच्चों का भी नामांकन कराया गया है. एनआरबीसी स्कूल में वैसे ड्रौप आऊट गरीब व अनाथ बच्चों का नामांकन कराया जाता है जो कभी स्कूल गये हीं नहीं. शिक्षा से पूरी तरह वंचित बच्चों को यहा निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराकर, उन्हें स्कूल में नियमित पढ़ने की आदत डाल, बाद में इनका नामांकन सरकारी व कस्तूरबा विद्यालय में करा शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ दिया जायेगा. इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिये एस्पायर ने स्थानीय शिक्षित युवकों को नियुक्त किया है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-on-september-11-the-participants-of-the-state-level-yoga-competition-will-be-selected/">चाईबासा

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आने-जाने के लिए है एक मात्र कच्ची फौरेस्ट रोड 

[caption id="attachment_415264" align="aligncenter" width="552"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/kiriburu-4.jpeg"

alt="" width="552" height="368" /> स्कूल से कुछ दूरी पर स्थित टोयबो झरना[/caption] ऐसे तो सारंडा का टोयबो जगह प्राकृतिक खूबसूरती एंव यहां मौजूद ऐतिहासिक झरना के लिये प्रारम्भ से जाना जाता था. इस झरना को देखने वर्ष 2002 से पहले हजारों पर्यटक जाया करते थे. सारंडा के थोलकोबाद वन विश्रामागार से टोयबो झरना की दूरी लगभग 7-8 किलोमीटर है. यहाँ जाने के लिये एक मात्र कच्ची फौरेस्ट रोड है. टोयबो और नुरदा गाँव में रहने वाले सभी लोग जमीन को इन्क्रोचमेंट कर बाहर से आकर बसे हैं. अभी भी इन गांवों को सरकारी मान्यता नहीं मिल पाई है. जिस कारण यहाँ विकास या किसी प्रकार की सरकारी सुविधा गांवों में पहुंचने की बात करना बेमानी होगी. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-bms-representatives-leave-from-gua-to-attend-the-meeting-to-be-held-at-bsl-bokaro/">नोवामुंडी

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कभी नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था टोयबो व थोलकोबाद

सारंडा का टोयबो गांव, थोलकोबाद व आसपास का क्षेत्र वर्ष 2002 से 2011 तक भाकपा माओवादी नक्सलियों की राजधानी व शरणस्थली रहा था. इस क्षेत्रों में उस दौरान किसी बाहरी को जाने की इजाजत नहीं होती थी. वर्ष 2006-07 के दौरान नक्सलियों ने ओडिशा के चांदीपोश चेकनाका पास लगभग 12 टन बारूद लदी वाहन को ओडिशा पुलिस के एसआई की हत्या कर लूट लिया था. लूटे गये बारुद भरा ट्रक को सारंडा के बिटकिलसोय, तिरिलपोसी, थोलकोबाद होते इसी टोयबो गांव व झरना क्षेत्र की अलग-अलग पहाड़ियों व जंगलों में छुपा कर रखा था. उस समय पूरे टोयबो क्षेत्र में बारूद की गंध आती थी. परन्तु आज स्थिति पूरी तरह से बदल गई है. अब यहाँ के बच्चे शिक्षित होकर अपने भविष्य की नई गाथा लिख रहे है. मालुम हो कि पिछले दिनों आईएएस शेखर भानु राव (नीति आयोग के निदेशक जनरल) ने एस्पायर संस्था के सचिव दयाराम, स्मिता अग्रवाल (एजुकेशन डायरेक्टर) आदि ने इस स्कूल का जायजा लिया था और एस्पायर की प्रशंसा की थी. [wpse_comments_template]

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