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किरीबुरू : हाथियों की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चों को किरीबुरू में रखा गया

Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा में हाथियों के समूह के निरंतर भ्रमणशील रहने की वजह से ग्रामीण स्कूली बच्चे किरीबुरू में रहकर परीक्षा देने को मजबूर हैं. 7 मई की शाम लगभग 5 बजे के करीब हाथियों का बड़ा समूह सेल की मेघाहातुबुरु खदान के लोडिंग साइड में पहुंच गया था. उस समय हाथी निरंतर चिघाड़ मार रहे थे. इससे सेलकर्मियों में भारी दहशत व्याप्त हो गया था. मेघाहातुबुरु लोडिंग साइड में हाथियों का समूह पास के गांव रांगरिंग, बोड़दाभट्ठी, नुईयागड़ा आदि क्षेत्र के जंगलों से होकर आये थे. इन क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियां निरंतर जारी है. इससे ग्रामीण एवं स्कूली बच्चे भयभीत हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-kshatriya-samaj-celebrated-maharana-pratap-jayanti/">जमशेदपुर

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घने जंगलों व पहाड़ियों को पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

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alt="" width="600" height="400" /> उक्त गांवों के 33 बच्चे लगभग 10 किलोमीटर दूर मेघाहातुबुरु स्थित प्रोजेक्ट प्लस-टू उच्च विद्यालय एवं किरीबुरू स्थित अपग्रेडेड उच्च विद्यालय में पढ़ने आते हैं. ये बच्चे गांव से पैदल घने जंगलों व पहाड़ियों को पार कर स्कूल आते जाते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से ये बच्चे हाथियों के डर से स्कूल जाना बंद कर दिया है. बीते दिनों स्कूलों में विभिन्न वर्गों की परीक्षा प्रारम्भ हुई है. ऐसे में बच्चों को परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है. लेकिन हाथी इनके स्कूल जाने में बाधक बने हुए हैं. ऐसी स्थिति में एस्पायर संस्था, स्थानीय मुखिया व अन्य लोगों ने इस समस्या के समाधान हेतु एक रास्ता निकाला. इन सभी 33 बच्चों को किरीबुरू स्थित सेल प्रबंधन की खाली आवासों में लाकर रखा है. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-bbmku-is-starting-llm-course-but-students-are-not-interested/">धनबाद

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कई बार ग्रामीणों व स्कूल बच्चों का हाथियों का हुआ आमना-सामना

यहां बच्चों को खाने के लिए मुखिया पार्वती किड़ो व अन्य पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई है. अब बच्चे किरीबुरू में रहकर ही स्कूल जा रहे हैं एवं परीक्षा दे रहे हैं. इससे बच्चों व उनके अभिभावकों में हाथियों का खौफ कम हुआ है. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों हीं धर्नादिरी गांव में हाथी ने एक ग्रामीण को कुचल कर मार दिया था. इसके अलावे कई बार जंगल में हाथियों से ग्रामीणों व स्कूली बच्चों का आमना-सामना हुआ जिसमें ग्रामीण व बच्चे जान बचाकर भागने में सफल रहे हैं. [wpse_comments_template]

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