माया सभ्यता से भी जुड़ा हो सकता है झारखंड का मंडा पर्व
शेड नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में अधजले शव को नदी में बहाकर चले जाते हैं लोग
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम, ईसाई, आदिवासी जैसे कुछ समुदाय के लोग अपने परिजनों के मृत शरीर को अपने-अपने कब्रिस्तान में दफनाते हैं. लेकिन दोनों सीमावर्ती राज्यों के हिंदू, सिख आदि समुदाय के लोग शवों के अंतिम संस्कार के लिए झारखंड सीमा के किरीबुरु शहर से सटे ओडिशा के पचरी गांव के समीप स्थित कारो नदी तट किनारे श्मशान घाट पर जाते हैं. ऐसे में बरसात के मौसम में लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है. क्योंकि इस श्मशान घाट पर शव जलाने या शव यात्रा में शामिल लोगों के छुपने के लिए कोई शेड नहीं है. इस वजह से भारी वर्षा के बीच शव जलाना मुश्किल हो जाता है. कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि लोग अधजले शव को नदी में बहाकर चले जाते हैं. इसे भी पढ़े : गढ़वा">https://lagatar.in/the-minister-made-the-mla-representative-who-filed-a-public-interest-litigation-against-the-ghanta-ghar-in-garhwa-withdrew-the-file-from-the-lawyer/">गढ़वामें घंटा घर के विरोध में जनहित याचिका दायर करनेवाले को मंत्री ने बनाया विधायक प्रतिनिधि, वकील से वापस ले ली फाइल
2020 में झारखंड क्षेत्र से आने वाले शवों को कारो श्मशान घाट पर जलाने से लगा दिया था गया रोक
विदित हो कि दो वर्ष पूर्व ऐसे ही मामले को लेकर विवाद बढ़ गया था. जब एक अधजला शव पास के गांव के नदी किनारे में पत्थर व झाड़ियों के बीच फंस गया था. जहां शव फंसा था वहां ग्रामीण स्नान करने व पेयजल आदि के रूप में इस्तेमाल के लिए पानी ले जाते थे. वहीं, इस घटना के बाद से ओडिशा के लोगों ने जुलाई 2020 में झारखंड क्षेत्र से आने वाले शवों को कारो श्मशान घाट पर जलाने से रोक लगा दिया था. उस समय मेघाहातुबुरु निवासी कैलाश धोबी के शव को भी पारंपरिक हथियार से लैश ग्रामीणों ने जलाने से मना कर दिया था. हालांकि, किरीबुरु के तत्कालीन इन्स्पेक्टर सह थाना प्रभारी शिवपूजन बहेलिया, किरीबुरु पश्चिम पंचायत की मुखिया पार्वती किड़ो आदि ने बोलानी के तत्कालीन सरपंच से वार्ता कर इस समस्या का समाधान कराया था. इसके बाद से अब तक शव वहां जलाये जा रहे हैं. इसे भी पढ़े : एक">https://lagatar.in/same-doctor-in-nephrology-department-of-rims-no-kidney-transplant-even-after-a-year-of-announcement/">एकही डॉक्टर के भरोसे रिम्स का नेफ्रोलॉजी विभाग, घोषणा के एक साल बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं
वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण ठेकेदार एसोसिएशन शेड बनाने का कार्य नहीं कर पाये प्रारंभ
लेकिन सवाल आज भी वही है कि बरसात के मौसम में खास से लेकर आम तक के शवों को बिना शेड के कैसे जलाया जाये! विदित हो कि इसके लिये ठेकेदार वेलफेयर एसोसिएशन किरीबुरु-मेघाहातुबुरु के ठेकेदारों ने सकारात्मक प्रयास करते हुये आपस में सहयोग राशि देकर लाखों रुपये फंड जमा कर लिये थे. लेकिन ओडिशा वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण ठेकेदार एसोसिएशन शवदाह गृह अथवा शेड बनाने का कार्य प्रारंभ नहीं कर पाये. वहीं, झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरु के महामंत्री राजेन्द्र सिंधीया ने कुछ सेलकर्मियों के साथ क्योंझर जिला प्रशासन व डीएफओ को शवदाह गृह बनवाने और एनओसी प्रदान करने के लिये पत्र भी पूर्व में दिया था. लेकिन दोनों अधिकारी का तबादला होने की वजह से मामला अधर में लटक गया. इसे भी पढ़े : खूंटी:">https://lagatar.in/khunti-women-farmers-visited-integrated-livelihood-farm/">खूंटी:महिला किसानों ने किया समेकित आजीविका फार्म का भ्रमण
झारखंड मजदूर संघ के महामंत्री एनओसी के लिये डीएफओ को लिखेंगे पत्र
हालांकि, अब राजेन्द्र सिंधिया एक बार पुनः बोलानी पंचायत के सरपंच मूगा मुंडा से बात कर फॉरेस्ट एनओसी के लिये क्योंझर के डीएफओ को पत्र लिख आग्रह करने वाले हैं. उन्होंने लगातार न्यूज को बताया की एनओसी मिलने के बाद सेल प्रबंधन के अलावा ठेकेदार एसोसिएशन, आम जनता के संयुक्त सहयोग से इस शवदाह गृह का निर्माण जनहित में कराने का कार्य किया जायेगा, ताकि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक इस समस्या का समाधान हो सके. इसे भी पढ़े : झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-minister-raised-the-issue-of-non-receipt-of-centres-share/">झारखंडकी मंत्री जोबा मांझी ने उठाया केंद्रांश नहीं मिलने का मुद्दा [wpse_comments_template]

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