अक्टूबर को आयोजित आर्ट 81 कार्यक्रम का पोस्टर लॉन्च
alt="" width="600" height="400" /> मां गिरि राजेश्वरी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. कहा जाता है कि दशकों वर्ष पूर्व जब सेल किरीबुरु का टाउनशिप ओडिशा के बैसकैंप में था, तभी बेसकैंप के होरोमोटो टोला निवासी रामराय की गर्भवती बेटी अपनी एक मासूम बेटी को साथ लेकर अपना इलाज कराने सेल के एक वाहन से हिलटॉप जा रही थी. जाते समय मंदिर वाले स्थान पर उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस दुर्घटना में मां व बेटी की दर्दनाक मौत हो गई थी. इसके अलावे इस स्थान पर कई दुर्घटनाएं होती रहती थी. इस घटना के लगभग दो साल बाद एक पूर्व सेलकर्मी को स्वप्न में मां दुर्गा ने घटनास्थल पर एक मंदिर बनवाने का आदेश दिया. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-death-anniversary-of-ljp-founder-ram-vilas-paswan/">Adityapur
: लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की पुण्यतिथि मनी इसके बाद मूर्ति नामक पूर्व सेलकर्मी ने आसपास के लोगों की मदद व सेल के सहयोग से यहां एक छोटा मंदिर बनवाया और माता की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की. मंदिर बनने के बाद इस सड़क पर दुर्घटना बंद हो गयी. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि पहले यहां के पुजारी पूजा कर मंदिर के बाहर प्रसाद रख देते थे. अंधेरा होने पर एक बाघ मंदिर में आता था और प्रसाद खाकर चला जाता था. कहा जाता है कि मां दुर्गा के इस मंदिर में पूरी आस्था व विश्वास के साथ जो भी कुछ मांगता है, उसकी मन्नत पूर्ण होती है. सेल, पुलिस-प्रशासन व विभिन्न संस्थानों के कई उच्च अधिकारियों की मन्नतें पूरी हुई हैं. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-two-arrested-with-brown-sugar-from-muslim-colony/">Adityapur
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