Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

किरीबुरु : बड़ाजामदा अस्पताल में डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान

Advertisement
Advertisement
Kiriburu : बड़ाजामदा का सरकारी अस्पताल लौहांचल व सारंडा के मरीजों के लिये सफेद हाथी साबित हो रहा है. उक्त क्षेत्र के मरीज यातायात समेत तमाम प्रकार की समस्याओं को झेलते हुये इस अस्पताल में अपना इलाज कराने आते हैं. लेकिन अस्पताल में डॉक्टर के मौजूद नहीं रहने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है. एक जून को भी इस अस्पताल में कई मरीज अपना इलाज कराने आये. लेकिन सुबह लगभग 11.30 बजे तक किसी चिकित्सक या नर्स आदि स्टाफ के नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. वहीं, अस्पताल के चिकित्सक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार और एक नर्स लगभग 11.30 बजे अस्पताल पहुंचे व इस गलती पर पश्चाताप करने लगे. हालांकि, यह स्थिति प्रतिदिन की है. [caption id="attachment_322086" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/06/badajamda-govt-hospital-.jpg"

alt="" width="600" height="270" /> डाक्टर के इंतजार में बाहर बैठे मरीज.[/caption] इसे भी पढ़े : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-bjp-district-president-vipin-purti-resigned-from-the-post-of-district-president/">चाईबासा

: भाजपा जिला अध्यक्ष विपिन पूर्ति ने जिला अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

सारंडा व लौहांचल में नहीं है चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा 

विदित हो कि प्राकृतिक खनिज व वन संपदा से परिपूर्ण और सात सौ पहाड़ियों की घाटी के नाम से एशिया प्रसिद्ध सारंडा जंगल की गोद में सेल की चार बड़ी खदानें किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुवा व चिड़िया और टाटा स्टील की नोवामुंडी व बराईबुरु खदान के बसे होने के बावजूद सारंडा व लौहांचल में चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा नहीं होना सारंडा व लौहांचल के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों व राज्य सरकार के लिये अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. हालांकि, लौहांचल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु रुपये व फंड की कोई कमी नहीं है, यहां कमी है तो बस बेहतर इच्छा शक्ति की. इसे भी पढ़े : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-forest-area-has-become-treeless-due-indiscriminate-felling-of-trees/">किरीबुरु

: पेड़ो की अंधाधुंध कटाई से वन क्षेत्र हुआ पेड़ विहीन

प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये डीएमएफटी फंड में देती है खदानें

उल्लेखनीय है कि सेल की किरीबुरु, मेघाहातुबुरु व गुवा खदान प्रबंधन प्रतिवर्ष लगभग 100 से 120 लाख टन (प्रत्येक खदान का उत्पादन 35-40 लाख टन) अयस्क का उत्पादन करती है. वहीं, चिड़िया खदान प्रबंधन लगभग तीन से चार लाख टन उत्पादन करती है. इस उत्पादन के एवज में सेल की चारों खदान प्रबंधनें पश्चिम सिंहभूम की डीएमएफटी फंड में प्रतिवर्ष लगभग एक हजार करोड़ रुपये वर्ष 2011-12 से देते आ रही है. इसके अलावा टाटा स्टील खदान प्रबंधन व सारंडा की अन्य प्राईवेट खदानें भी सैकड़ों करोड़ रुपये प्रति वर्ष डीएमएफटी फंड में देती है. डीएमएफटी फंड में खदान प्रबंधन इसलिये पैसा देती है, क्योंकि इन पैसों से खदान से प्रभावित सारंडा के गांवों का सर्वागीण विकास जैसे बेहतर चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल, सड़क, बिजली, यातायात आदि सुविधाएं बहाल किया जा सके. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज तक इनमें से कोई भी सुविधा बेहतर तरीके से सारंडा में बहाल अब तक नहीं की जा सकी है. इसे भी पढ़े : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-despite-no-entry-in-barajamda-heavy-vehicles-are-being-left-openly/">किरीबुरु

: बड़ाजामदा में नो इन्ट्री के बावजूद खुलेआम छोड़े जा रहे हैं भारी वाहन

बेहतर इलाज के लिये जिले में एक भी अस्पताल नहीं

वहीं, जानकारों का कहना है कि सरकार व प्रशासन अगर ईमानदारी पूर्ण प्रयास करती तो सारंडा जोन में कहीं भी लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से 500 से 1000 बेड क्षमता वाली बेहतर सुपर स्पेशलिटी सरकारी अस्पताल का निर्माण करा सकती थी. साथ ही सारंडा व आसपास के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा निःशुल्क या न्यूनतम दर पर उपलब्ध करा सकती थी. उक्त अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ आदि का खर्च प्रति वर्ष डीएमएफटी फंड से खदान प्रबंधनों द्वारा दी जाने वाली हजारों करोड़ रुपये से वहन करा सकती थी. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि डीएमएफटी फंड में इतना पैसा आने के बावजूद पूरे जिले में ऐसा एक भी अस्पताल नहीं है, जो यहां के गंभीर मरीजों की जान बचा सके. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-excise-department-raids-in-nutandih-and-dukhudih-of-birsanagar/">जमशेदपुर

: बिरसानगर के नूतनडीह व दुखुडीह में आबकारी विभाग का छापा

सेल की अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी

विदित हो कि यहां ऐसा कोई अस्पताल नहीं है, जहां वेंटिलेटर, सिटी स्कैन, इन्डोस्कोपी, क्लोनोस्कौपी आदि जांच की सुविधा हो. सारंडा में सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु (लगभग एक सौ बेड क्षमता), गुवा (लगभग 50-60 बेड) व चिड़िया अस्पताल के अलावा टाटा स्टील की नोवामुंडी अस्पताल को छोड़ एक भी ऐसा अस्पताल नहीं है, जहां 24 घंटे मरीजों को प्रारंभिक इलाज उपलब्ध हो सके. मुफ्त चिकित्सा सुविधा का सारा भार सेल की अस्पतालों पर है, लेकिन यहां जांच व विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-passenger-looted-by-mixing-intoxicants-in-a-pot-in-tata-chhapra-express/">जमशेदपुर:

टाटा-छपरा एक्सप्रेस में गमछा में नशा मिलाकर यात्री को लूटा

इलाज के लिये मरीजों को जमशेदपुर या राउरकेला जाना पड़ता है

विदित हो कि छोटानागरा में पच्चीस बेड का सरकारी अस्पताल बनकर तैयार है, लेकिन चिकित्सकों व संसाधनों की भारी कमी से यह भी लगभग मृत स्थिति में है. ऐसे में गंभीर स्थिति में मरीजों को जमशेदपुर या राउरकेला जाना पड़ता है. लेकिन गरीब मरीज ऐसे अस्पतालों का खर्च उठाने में भी सक्षम नहीं है. केन्द्र सरकार द्वारा कुछ गरीबों को आयुष्मान कार्ड अवश्य दिया गया है, लेकिन इस कार्ड के माध्यम से इलाज कराने हेतु बेहतर अस्पताल का भी क्षेत्र में होना जरूरी है. इसे भी पढ़े : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-four-people-caught-stealing-in-balliapur-police-sent-to-jail/">धनबाद

: बलियापुर में चोरी करते पकड़े गए चार लोग, पुलिस ने भेजा जेल
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही