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किरीबुरू : छोटानागरा हतनाबुरू के समीप पुलिया क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांव का संपर्क मुख्यालय से टूटा

Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा के दर्जनों गांव को छोटानागरा की तरफ से जोड़ने वाली एक मात्र सड़क हतनाबुरू गांव के समीप स्थित पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई है. यह पुलिया पिछले एक वर्ष से टूटी हुई है. अब बारिश की वजह से छोटानागरा के अलावे प्रखंड व जिला मुख्यालय के साथ-साथ तमाम अस्पतालों से आसपास के गांवों का संपर्क टूट गया है. इस मार्ग से सारंडा के कुमडीह, कोलायबुरु, कुदलीबाद, उसरुईया, दिकुपोंगा, मारंगपोंगा, बालिबा, थोलकोबाद आदि अन्य गांव के ग्रामीण तमाम कार्यों के लिये प्रतिदिन आना-जाना करते हैं. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-action-will-be-taken-on-doctors-of-sadar-hospital-for-prescribing-external-medicine/">चाईबासा

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[caption id="attachment_380220" align="aligncenter" width="507"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/kiriburu-road-1.jpeg"

alt="" width="507" height="338" /> क्षतिग्रस्त पुल के बगल में बना डायवर्सन[/caption]

अस्थायी व्यवस्था को भी ठेकेदार ने किया ध्वस्त

हतनाबुरु गांव के आगे मुख्य सड़क पर स्थित यह पुलिया पिछले वर्ष बारिश में टूट गई थी. ग्रामीणों के काफी प्रयासों के बावजूद जिला प्रशासन व वन विभाग द्वारा इसे दुरुस्त कराने के लिए कोई पहाल नहीं की गई. पुलिया टूटे होने से लोगों को काफी असुविधा हो रही है. समस्या से निपटने के लिए पिछले दिनों ग्रामीणों ने श्रमदान कर जैसे-जैसे टूटे पुल को पत्थर व मिट्टी से भर कर चलने लाया का बनाया था. लेकिन पिछले दिनों एक ठेकेदार द्वारा पुलिया निर्माण के नाम पर इस अस्थायी व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दिया गया. अब तक पुलिया का निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-fufa-killed-a-child-by-slitting-his-throat-in-seraikela/">जमशेदपुर:

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 बारिश के दिनों में स्थिति हो जाती है भयावह

पुलिया के बगल में स्थित नाले से ग्रामीणों ने अस्थाई रास्ता बनाया हैं, लेकिन वर्षा होने के बाद नाले में पानी भरने से इस मार्ग से भी आवागमन पुरी तरह से बंद हो जाता है. ग्रामीणों में इसे लेकर नाराजगी भी है. कोलायबुरु निवासी पिरती देवगम एंव अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सारंडा के गांवों के विकास का बाधक कौन बना हुआ है इस पर विचार करने की जरूरत है. सड़क, पुल-पुलिया, चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल आदि व्यवस्था क्यों चरमराई हुई है. ग्रामीण अस्पताल, प्रखंड, अनुमंडल व जिला मुख्यालय, कृषि व वनोत्पाद बेचने आदि के लिए किस रास्ते से जाएं इस पर संज्ञान लेने वाला कोई नहीं. [wpse_comments_template]

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