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किसी भी गांव में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है : लक्ष्मण हुनी पूर्ति
alt="" width="1156" height="521" /> किरीबुरु से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धर्नादिरी गांव निवासी लक्ष्मण हुनी पूर्ति ने लगातार न्यूज से बातचीत में कहा कि हम ग्रामीण जी रहे हैं, यही सबसे बड़ी बात है. सारंडा के किसी भी गांव में सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है. हमारा खेत अथवा जमीन सिर्फ नाम के लिये है. उस पर वे वर्षा आधारित खेती करते हैं. सही समय पर वर्षा नहीं हो तो पैदावार भी घाटे का हो जाता है. खेती इतनी ही होती है कि उसका इस्तेमाल हम स्वयं व बच्चों के पौष्टिक आहार के रूप में इस्तेमाल नहीं कर उसे बाजार में बेच दो पैसा प्राप्त करते हैं. इसी दो पैसों से हम दवा, राशन सामग्री आदि अन्य जरूरत का सामान खरीदते हैं. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-the-unique-gift-of-nature-is-spreading-its-unique-shade-the-consummate-waterfall-of-ghaghra/">चाकुलिया
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मुर्गी व बकरी भी बेचने के लिए पालते हैं
alt="" width="1156" height="521" /> सारंडा के अन्य ग्रामीण जो पशुपालन भी करते हैं, उसने बताया की हम गाय पालते हैं तो गोबर मात्र पाते हैं. दूध को पूरा बेच देते हैं. बच्चों के पीने के लिये दूध नहीं रख पाते हैं. मुर्गी व बकरी भी पालते हैं. इसे भी हम हाट-बाजार में बेच जरूरत का सामान खरीदते हैं. कई बार तो अज्ञात बीमारी से हमारी सभी मुर्गी व बकरियां मर जाती हैं. इससे भारी नुकसान होता है. हमारे पास जीविकोपार्जन का दूसरा कोई संसाधन नहीं है. [wpse_comments_template]

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