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किरीबुरु : पेड़ो की अंधाधुंध कटाई से वन क्षेत्र हुआ पेड़ विहीन

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Kiriburu :  वन, पर्यावरण एंव जलवायु परिवर्तन विभाग ने सारंडा वन प्रमंडल के ससंगदा (किरीबुरु) वन प्रक्षेत्र अन्तर्गत कम्पार्टमेंट संख्या-35 के जंगलों में सिल्वी कल्चरल ऑपरेशन के तहत 130 हेक्टेयर वन भूमि पर वर्ष 2016-19 में 19,500 पौधों का रोपण लाखों रुपये खर्च कर किया था. लेकिन दुख व आश्चर्य की बात यह है कि वन विभाग स्वयं लगाएं पौधों में से एक भी पौधा को बचा नहीं सका. जहां यह पौधारोपण किया गया था वह स्थान ससंगदा रेंज कार्यालय से महज 100-200 मीटर की दूरी पर है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-excise-department-raids-in-nutandih-and-dukhudih-of-birsanagar/">जमशेदपुर

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 झरने से पेयजल आपूर्ति की जाती थी

[caption id="attachment_322100" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/06/forest1.jpg"

alt="" width="600" height="360" /> वन विभाग को झूठा साबित करते हुए मुंह चिढ़ाती यह बोर्ड.[/caption] उल्लेखनीय है कि वर्षों पहले ससंगदा रेंज कार्यालय के आस-पास के हजारों साल के पेड़ को स्थानीय लोगों ने जलावन व फर्नीचर बनाने के उद्देश्य से एक-एक कर काट उस वन क्षेत्र को पेड़ विहीन कर दिया था. जहां के पेड़ों को काटा गया था ठीक उससे नीचे प्राकृतिक झरना है. पहले इस झरने के पानी को मोटर के सहारे सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु आवासीय क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जाती थी. लेकिन उपरी पहाड़ी पर स्थित पेड़-पौधों की कटाई की वजह से झरने का जल भंडारण अथवा जलश्रोत रिचार्ज होना बंद हो गया. इससे झरने से पर्याप्त मात्रा में पानी निकलना बंद हो गया. जानकार बताते है कि ऊंचे पहाड़ पर पेड़-पौधों के होने से वर्षा का पानी उसके जड़ आदि के सहारे जमीन में प्रवेश कर भूमिगत जल श्रोत को रिचार्ज करता है. पेड़-पौधें नहीं होने से पानी बहकर सीधे नीचे चला जाता है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-roads-have-been-dug-out-the-result-of-yesterdays-road-accident-laubha/">आदित्यपुर

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 सरकार को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा 

वन विभाग ने वर्ष 2016 में ससंगदा रेंज कार्यालय से सटा किरीबुरु टीआर गेट, श्मशान घाट से लेकर वायरलेश मैदान क्षेत्र के लगभग 130 हेक्टेयर वन भूमि पर बांस व अन्य पौधें लगाये थे ताकि यह क्षेत्र फिर से हरा-भरा हो जाये एंव इस क्षेत्र के नीचे स्थित प्रोस्पेक्टिंग झरना के भूमिगत जल श्रोतों को भी बढ़ाया जा सके. लेकिन वन विभाग की भारी लापरवाही की वजह से आज एक भी पौधा नहीं लग सका. इससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-if-the-pits-on-the-road-are-not-filled-then-the-people-of-ward-17-and-33-will-agitate/">आदित्यपुर

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