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आग से नेचुरल रिसोर्सेज हो जाएगा खत्म
[caption id="attachment_552452" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="180" /> जंगल में आग की लपटें.[/caption] पर्यावरण प्रेमियों ने बताया की जंगल में रहने वाले लोगों के लिये महुआ, इमली, आम, कटहल, चिरौंजी, तेंदू पत्ता, श्याली, साल, धूना, कुसुम, बाँस, मशरूम आदि तमाम प्रकार के वनोत्पाद न सिर्फ जीने का आधार हैं बल्कि आर्थिक श्रोत भी है. अगर लोग जंगल में आग लगायेंगे तो वनोत्पाद के छोटे पौधे व बीज जलकर नष्ट होंगे. जिससे नेचुरल रिसोर्सेज खत्म हो जायेगा. जंगल में रहने वाले लोगों के सामने भूखमरी, पेयजल संकट, तरह-तरह की बीमारियों, आर्थिक तंगी की समस्याओं से गुजरना पडे़गा. जंगल में गिरे सूखे पत्ते वर्षा के पानी को रोक कर भूमिगत जल स्तर को उंचा करता है. जंगल की आग वन्यप्राणियों को भी भारी नुकसान पहुंचाता है. ऐसी स्थिति में हम जंगल में आग लगाकर प्रकृति के साथ गहरी दुश्मनी मोल ले रहे हैं जिसका भारी नुकसान तमाम लोगों को उठाना पडे़गा. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-single-phase-meter-installed-at-the-homes-of-rural-consumers-increased-revenue/">आदित्यपुर
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