alt="" width="1280" height="744" /> सूखे पत्तों से ऐसे बनेगा ब्रिकेटस.[/caption] इसे भी पढ़ें :सरायकेला:">https://lagatar.in/seraikela-caste-income-residential-certificate-and-lpc-work-stalled-due-to-strike-of-revenue-sub-inspectors/">सरायकेला:
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गुल्ले को जलाने से कम होगा प्रदूषण
[caption id="attachment_424316" align="alignnone" width="1280"]alt="" width="1280" height="729" /> सूखे पत्तों से ऐसे बनेगा ब्रिकेटस.[/caption] उल्लेखनीय है कि बायोमास ब्रिकेटस कोयले का बड़ा विकल्प है. जिन उद्योगों या जलावन कार्य में कोयले का इस्तेमाल किया जाता है उन जगहों पर बायोमास ब्रिकेट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिसका कारण है कि कोयले एंव लकड़ी को जलाने से वातावरण में काफी प्रदूषण उत्पन्न होता है. लेकिन अब बायोमास ब्रिकेटस का इस्तेमाल करने से प्रदूषण कम होगा. बायोमास ब्रिकेटस को एग्रिकल्चर वेस्ट जैसे की जंगल के सूखे पत्ते, पराली, सोयाबीन, अखरोट, बादाम के छिलके इत्यादि से तैयार किया जाता है. प्लास्टिक को छोड़ हर वह चीज जिसे जलाया जाता है उसका इस्तेमाल करके बायोमास ब्रिकेटस तैयार किये जाते हैं. ब्रिकेटस बनाने वाले प्लांट में जंगल के सूखे पत्तों को उठाकर डाला जायेगा. यह मशीन पत्तों को चूर व प्रेस कर उसका विभिन्न साईज में गुल्ला बना देगी. इस गुल्ले को तमाम प्रकार के जलावन कार्य में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इस गुल्ले को जलाने से प्रदूषण भी कम होगा. इसे भी पढ़ें : सरायकेला:">https://lagatar.in/seraikela-caste-income-residential-certificate-and-lpc-work-stalled-due-to-strike-of-revenue-sub-inspectors/">सरायकेला:
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