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किरीबरू : वनकर्मियों को मिला ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण, अब 'तीसरी आंख' से होगी जंगल की निगहबानी

Kiriburu (Shailesh Singh) : प​श्चिमी सिंहभूम वन विभाग अब वन्य जीवों की रक्षा के लिए नया तरीका अपनाने जा रहा है. विभाग वन्य जीवों पर ड्रोन से नजर रखेगा, जिसके लिए वन कर्मियों को ड्रोन कैमरा चलाने का प्र​शिक्षण दिया जा रहा है. की सहायता से जंगल के चप्पे-चप्पे पर नजर रख सकेंगे. ड्रोन की मदद से वनकर्मी आसानी से जंगल के दुर्गम स्थानों की जानकारी भी रख सकेंगे. ड्रोन से जंगल की तस्वीरें कैमरे में कैद होती रहेंगी, जिससे जंगल की व्यवस्था को देखना आसान होगा. इसी के मद्देनजर वनपाल प्रशिक्षण विद्यालय, चाईबासा में उप परिसर पदाधिकारी व वनकर्मियों को जीआईएस, जीपीएस व ड्रोन कैमरे को चलाने का प्रशिक्षण दिया गया. जिसमें सारंडा एवं पोड़ाहाट के कुल 75 वन​ कर्मियों ने प्रशिक्षण लिया. [caption id="attachment_352311" align="aligncenter" width="474"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/kiriburu-tranning-2.jpeg"

alt="" width="474" height="316" /> प्रशिक्षण के बाद फोटो खिंचवाते वन विभाग के कर्मचारी[/caption] इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-only-experiments-were-done-in-the-education-sector-in-73-years-new-education-policy-will-open-new-doors-of-development-ramesh-bais/">जमशेदपुर

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दुर्गम स्थानों में निगरानी के लिए ड्रोन की ली जाएगी मदद

रांची स्थित वन उत्पादकता संस्थान के कनिष्ठ परियोजना फेलो अंजर अनीश द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जियोइंर्फोमेटिक्स की सहायता से वनों पर नजर रखनी आसान हो जाती है. कैम्पा योजना की सभी कार्यों की विवरणी ई ग्रीन वॉच पोर्टल पर अपलोड करने एवं जीपीएस की सहायता से पॉलिगन बनाने की प्रशिक्षण दिया है. वनों में दुर्गम स्थान में निगरानी रखने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा सकती है. आने वाले दिनों में ड्रोन तकनीक लाइफ के हर पहलू में कारगर साबित होने वाली है. जंगल में गश्त के साथ तकनीक की भी अब जरूरत महसूस होने लगी है. लिहाजा तकनीक के साथ आगे बढ़ना होगा.
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alt="" width="498" height="332" /> जानकारी देते वन उत्पादकता संस्थान के कनिष्ठ परियोजना फेलो अंजर अनीश[/caption]
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तकनीक की जानकारी वनकर्मियों को होना जरूरी

प्रशिक्षण में उनको ड्रोन के पार्ट्स, सेटिंग, चलाने व ड्रोन के वन्य जीवन में उपयोग जैसे मानव वन्य जीव संघर्ष की निगरानी, वन अग्नि, अवैध पातन, अवैध शिकार, अवैध अतिक्रमण, जंगलों में तस्करी और अवैध खनन आदि में ड्रोन की मदद से आसानी से वन संपदा को बचाया जा सकता है.
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ड्रोन की मदद से वन्य जीव संघर्ष रोकने में काफी हद तक वन विभाग को सफलता मिलेगी. प्रशिक्षण के लिए मिनी ड्रोन कैमरे का उपयोग किया गया था. इस प्रशिक्षण में पोड़ाहाट वन प्रमंडल पदाधिकारी नितीश कुमार, संलग्न पदाधिकारी सारंडा वन प्रमंडल प्रजेश कांता जेना एवं सहायक वन संरक्षक निरंजन कुमार, प्रभारी वनपाल आदित्य कुमार, सुमित कुमार व अलग अलग वन प्रक्षेत्र से आए कंप्यूटर ऑपरेटर उपस्थित थे.

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