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किरीबुरू : कैसे बचेगी सारंडा समेत जिले के तमाम जंगल? गर्मी में कैसे बुझेगी जंगलों में लगने वाली आग?

Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा समेत पश्चिम सिंहभूम जिले के तमाम वन प्रमंडल वेंटीलेटर पर. पदाधिकारियों व वनकर्मियों की भारी कमी की वजह से कैसे बचेगा सारंडा, कोल्हान, पोडा़हाट आदि वन प्रमंडलों के जंगल एवं कैसे बुझेगी इन जंगलों में लगने वाली आग ! सारंडा वन प्रमंडल के अधीन चार रेंज जिसमें ससंग्दा (किरीबुरू), गुआ, कोयना (मनोहरपुर), समता (जराईकेला) लंबे समय से रेंजर विहिन हैं. इन रेंजों का प्रभार कोल्हान वन प्रमंडल के रेंजरों को सौंपा गया है. चारों रेंज क्षेत्र में करोड़ों रुपये का कार्य वन विभाग करा रही है. बिना मैन पावर के कैसे कार्य हो रहा होगा उसे आसानी से समझा जा सकता है. पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रमंडलों के लिए 6 डीएफओ की जरूरत है. इसमें से मात्र तीन डीएफओ हैं. [caption id="attachment_577233" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/Kiriburu-Forest-Fire-1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> आग लगने से जले जंगल के पेड़-पौधों की फाइल फोटो.[/caption] इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-jsbcl-gets-responsibility-for-construction-of-jugsalai-and-chakulia-degree-college-buildings/">जमशेदपुर

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जमशेदपुर व चाईबासा में सीएफ स्तर पर कोई पदाधिकारी नहीं है

सारंडा वन प्रमंडल में डीएफओ का पद 31 जनवरी के बाद से प्रभारी डीएफओ के भरोसे चल रहा है. इस जिले के सभी वन प्रमंडलों व अन्य इकाइयों में वर्तमान में एसीएफ व रेंजर की संख्या मात्र 6 है. जमशेदपुर एवं चाईबासा में सीएफ स्तर पर कोई पदाधिकारी नहीं है. जमशेदपुर के डीएफओ हीं दोनों जिलों के सीएफ पद का प्रभार संभाल रहे हैं. जहां तक सारंडा वन प्रमंडल की बात है तो यहां कम से कम एक डीएफओ, एसीएफ, चारों रेंज में 1-1 रेंजर, प्रत्येक रेंज में 3-4 फॉरेस्टर एवं 72 वनरक्षी होने चाहिए. लेकिन वर्तमान में यहां एक भी डीएफओ, एसीएफ, रेंजर, फॉरेस्टर नहीं हैं. 72 वनरक्षी की जगह मात्र 40 वनरक्षी हैं. कोल्हान के रेंजर शंकर भगत को किरीबुरू एवं जराईकेला, राजेश्वर प्रसाद को गुवा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. जबकि मनोहरपुर में कोई रेंजर नहीं है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-three-injured-in-road-accident-two-in-critical-condition/">चाईबासा

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वन विभाग हीं वेंटीलेटर पर पड़ी है

ऐसी स्थिति में विभिन्न रेंज में नियुक्त वनरक्षी अपना-अपना कार्य ईमानदारी पूर्वक निभा रहे हैं अथवा नहीं, जंगल में गश्ति हो रही है अथवा नहीं, जंगल में निरंतर आग लग रही है, उसे बुझाया जा रहा है या नहीं उसे देखने के लिए कोई पदाधिकारी नहीं है. दूसरे वन प्रमंडल अथवा रेंज के प्रभार में रहने वाले पदाधिकारी कभी भी बडे़ कार्यों व मामलों में रिश्क लेना नहीं चाहेंगे. दूसरी तरफ अपने कार्य क्षेत्र को छोड़ कर वह प्रभार वाले क्षेत्र पर विशेष ध्यान नहीं देंगे. ऐसी स्थिति में जब वन विभाग हीं वेंटीलेटर पर पड़ी है और आखिरी सांसे लै रही हो तो पश्चिम सिंहभूम के सारंडा, कोल्हान एवं पोड़ाहाट जैसे ऐतिहासिक जंगल को गर्मी के मौसम में लगने वाली भीषण आग से कैसे बचाया जा सकता है. [wpse_comments_template]

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