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किरीबुरु : पर्याप्त संख्या में मजदूर होने के बाद भी खदान में कार्य नहीं होना चिंता का विषय - राजेन्द्र सिंधिया

Kiriburu (Shailesh Singh) : सेल की किरीबुरु खदान के सभी विभागों में पर्याप्त संख्या में ठेका मजदूरों के होने के बावजूद कार्य नहीं होना चिंता का विषय है. यह समस्या इसलिए उत्पन्न हो रही है क्योंकि खदान के अनेक अधिकारी व ठेकेदार इन ठेका मजदूरों से खदान के अंदर अथवा बाहर कार्य न कराकर अपने निजी कार्यों को करवाने में लगे हैं. उक्त बातें झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरु के महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने कही है. उन्होंने कहा कि बीते दिन किरीबुरु के सीजीएम कमलेश राय ने भी वार्ता के दौरान कहा था कि जितने लोगों की जरूरत है, विभागों को उससे अधीक मेन पावर ठेका श्रमिकों के माध्यम से दिया गया है, फिर भी कार्य नहीं होना दुःखद है. इसे भी पढ़े : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-mla-champai-soren-betrayed-the-people-of-ichapid-area-ganesh-mahali/">आदित्यपुर

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ठेका श्रमिकों को उनके ड्यूटी अनुसार करना चाहिए वेतन भुगतान 

राजेन्द्र सिंधिया ने बताया कि हमारे संगठन द्वारा पड़ताल करने पर पाया गया की कुछ ठेका श्रमिकों की हाजिरी विभागों में बनती है, लेकिन वे शारीरिक रूप से अपने कार्य स्थल पर न होकर सेल के अधिकारी के आवासों में और कुछ ठेकेदारों के बगानों में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ठेका श्रमिकों की हाजिरी कार्यस्थल पर भी मौजूद रजिस्टर में पाली प्रभारी की देख-रेख में बनाई जानी चाहिए. ठेका श्रमिकों की हाजिरी ठेकेदार को विभाग से लेकर ही उनके ड्यूटी अनुसार वेतन भुगतान करना चाहिए, मगर ऐसा होता नहीं है. ठेकेदार जो ठेका मजदूरों की हाजिरी बना कर देते हैं, उसी पर विभाग मोहर मार देती है. इसे भी पढ़े : बंदगांव">https://lagatar.in/bandgaon-nakti-dam-is-facing-the-brunt-of-drought-farmers-trust-god-for-water/">बंदगांव

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कुछ ठेका श्रमिकों को 30 दिन काम करने के बाद भी मिल रहा 20 या 22 दिन का पगार

उन्होंने कहा कि कुछ ठेका श्रमिकों को 30 दिन काम करने के बावजूद 20 या 22 दिन का ही पगार मिलता है और कुछ कार्य क्षेत्र में नहीं दिखते हैं फिर भी उन्हें पूरी पगार मिलती है. यह बहुत ही शर्मनाक बात है. इस संबंध में उन्होंने सीजीएम से मांग की है कि जो जितने दिन काम कर रहा है, उसे उतने दिन का ही पगार मिले. साथ ही जो ठेका मजदूर अधिकारी अथवा ठेकेदार के घरों में काम कर रहे हैं, उन्हें अधिकारी अथवा ठेकेदार पगार दें. सेल इस का भुगतान क्यों करे! यहां तक की कुछ मजदूरों के छुट्टी लेने पर उन्हें काम से बैठा देने की धमकी दी जाती है. कुछ ठेकेदार तो इन मजदूरों को किरीबुरु से बाहर भी कार्य कराने भेज देते हैं. इसका प्रमाण भी हमने सीजीएम को उपलब्ध कराया है. सेल की उच्च कमिटी इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे. इसे भी पढ़े : तीसरे">https://lagatar.in/ed-team-again-reached-sahibganj-dmo-office-on-third-day-investigating/">तीसरे

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