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अपने मुख्यमंत्री काल में सबसे अधिक बाहरी लोगों से लुटवाया - बोबोंगा
इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं सांसद गीता कोड़ा को भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि 1932 के खतियानी के आधार से अंतिम सर्वे सेटेलमेन्ट के भू-अभिलेख में जिन वंशानुगत लोगों का नाम दर्ज है वह स्थानीय होंगे. मधु कोड़ा और गीता कोड़ा कोल्हान के लोगों को भ्रमित कर सस्ती राजनीति करना चाहते हैं. जिन लोगों ने झारखंड अलग राज्य की लड़ाई नहीं लड़ी वह राज्यवासियों के दर्द को क्या समझेंगे. बोबोंगा ने यह भी कहा कि क्या मधु कोड़ा, गीता कोड़ा कभी भी स्थानीयता का आवाज नहीं उठाया! रघुवर दास के 1985 खतियान का विरोध तक नहीं किया. आज पेट में दर्द हो रहा है. अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सबसे अधिक इस राज्य को बाहरी लोगों से लुटवाया. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-sociology-hod-of-kolhan-university-is-not-getting-seventh-pay-scale-upset/">चाईबासा
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जिन मूलवासियों, आदिवासियों के पास खतियान नहीं है उनकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी
यदि स्थानीयता का दर्द इतना ही था तो उस समय स्थानीय नीति तय करता. अभी तो विधेयक ही पास हुआ है इसे कई प्रक्रिया से गुजरना बाकी है. जिन मूलवासियों एवं आदिवासियों के पास खतियान नहीं है उनकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी. झारखंड बचाओ मोर्चा ने आज नोवामुंडी बाजार चौक में मधु कोड़ा व गीता कोड़ा का पुतला फुंका. इस कार्यक्रम में घनश्याम हेम्ब्रम, मतियस, अजय पुर्ती, सोनाराम पुर्ती, अजय हेम्ब्रम, राम हेम्ब्रम, दुंबी केराई के अलावे काफी संख्या में लोग उपस्थित थे. [wpse_comments_template]











































































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