Kiriburu (Shailesh Singh) : वर्ष 2024 में होने वाली लोक सभा चुनाव के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने अपना राजनीतिक दौरा व गतिविधियों को तेज कर दिया है. इसी क्रम में उन्होंने बुधवार को वह सारंडा के छोटानागरा स्थित उच्च विद्यालय मैदान प्रांगण में विभिन्न गांवों के ग्रामीणों व पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विशेष बैठक की और उनकी समस्याएं सुनी. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुये मधु कोड़ा ने कहा कि सारंडा के 26 गांवों के लोग आज भी आधारभूत संरचना, मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. इन गांवों के लोगों को आज भी शुद्ध पेयजल, इंदिरा आवास, चिकित्सा, सड़क, बिजली, उच्च शिक्षा, पुल-पुलिया, एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं हुआ हैं. जबकि सारंडा क्षेत्र में सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा, मनोहरपुर (चिड़ियां) जैसी बड़ी खदानें है. चारों खदानों से निकलने वाले लाल पानी से सारंडा के तमाम नदी-नाले दूषित हो गए है. ग्रामीणों के खेत भी बंजर हो गए है. जिस कारण ग्रामीणों को साफ पानी भी पीने को नसीब नहीं हो पा रहा है. वह खेती भी नहीं कर पा रहे हैं.
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alt="" width="600" height="400" /> उपस्थित कार्यकर्ता व ग्रामीण[/caption]बाहरी">https://lagatar.in/jamshedpur-digital-skilling-workshop-organized-at-mrs-kmpm-vocational-college/">बाहरी
उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड से बाईहातु में जलमीनार लगाया गया है, लेकिन उसका पानी सभी गांवों में पहुंच नहीं पा रहा है. सेल प्रबंधन ने सारंडा के ग्रामीणों की जमीन, प्राकृतिक जलश्रोत आदि बर्बाद कर व प्रदूषण फैलाकर उन्हें बेरोजगारी व बीमारी की आगोश में झोंक दिया है. लेकिन यहां के डिप्लोमा, आइटीआई, स्नातक आदि पास किये बेरोजगारों को खदान में नौकरी तक नहीं दी जा रही है. नौकरी सिर्फ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है. बीते 25 जून को सेल की बहाली हेतु सारंडा के करीब 23 बेरोजगारों ने जमशेदपुर आदि स्थानों पर जाकर साक्षात्कार दिया है. अगर नौकरी में सारंडा के उक्त बेरोजगारों को नहीं लिया गया तो सेल प्रबंधन की ईंट से ईंट बजा दिया जाएगा. सेल प्रबंधन ठेका व सप्लाई मजदूर का काम भी सारंडा के बाहरी लोगों को दे रही है. अब ऐसा होने नहीं दिया जायेगा. अगर ऐसा हुआ तो सारंडा में एक भी खदान खोलने व चलने नहीं देंगे. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-van-mahotsav-celebrated-in-noamundi-journalists-also-planted-saplings/">चाईबासा
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लोगों को काम देने पर होगा आंदोलन
उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड से बाईहातु में जलमीनार लगाया गया है, लेकिन उसका पानी सभी गांवों में पहुंच नहीं पा रहा है. सेल प्रबंधन ने सारंडा के ग्रामीणों की जमीन, प्राकृतिक जलश्रोत आदि बर्बाद कर व प्रदूषण फैलाकर उन्हें बेरोजगारी व बीमारी की आगोश में झोंक दिया है. लेकिन यहां के डिप्लोमा, आइटीआई, स्नातक आदि पास किये बेरोजगारों को खदान में नौकरी तक नहीं दी जा रही है. नौकरी सिर्फ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है. बीते 25 जून को सेल की बहाली हेतु सारंडा के करीब 23 बेरोजगारों ने जमशेदपुर आदि स्थानों पर जाकर साक्षात्कार दिया है. अगर नौकरी में सारंडा के उक्त बेरोजगारों को नहीं लिया गया तो सेल प्रबंधन की ईंट से ईंट बजा दिया जाएगा. सेल प्रबंधन ठेका व सप्लाई मजदूर का काम भी सारंडा के बाहरी लोगों को दे रही है. अब ऐसा होने नहीं दिया जायेगा. अगर ऐसा हुआ तो सारंडा में एक भी खदान खोलने व चलने नहीं देंगे. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-van-mahotsav-celebrated-in-noamundi-journalists-also-planted-saplings/">चाईबासा: नोवामुंडी में मनाया गया वन महोत्सव, पत्रकारों ने भी किया पौधरोपन
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