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किरीबुरू : खनन विभाग व वन विभाग निष्क्रिय, पुलिस ही कर रही इन दोनों का कार्य

Kiriburu (Shailesh Singh) : खनन विभाग व वन विभाग की निष्क्रियता से पश्चिम सिंहभूम जिला पुलिस पर वर्क लोड बढ़ गया है इससे पुलिस विभाग की परेशानी बढ़ गई है. इन्हीं विभागों की निष्क्रियता की वजह से पुलिस विभाग पर भी दूसरे विभाग से संबंधित संचालित गलत व अवैध कारोबार को लेकर दाग लग रहे है. अगर सभी विभाग अपना-अपना कार्य सक्रिय होकर करने लगे तो किसी भी विभाग पर अतिरिक्त बोझ नहीं पडे़गा. सब कार्य आसानी से होगा और जनता भी परेशान नहीं होगी. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-instead-of-tractor-lifting-of-sand-by-bicycle-and-scooty/">आदित्यपुर

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एक-दो चेकनाका लगा किया जा रहा कोरम पूरा

उल्लेखनीय है कि जिला खनन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह लौह, मैगनीज, गिट्टी-पत्थर, बालू आदि तमाम खनिज सम्पदाओं से जुड़ी अवैध कारोबार के खिलाफ निरंतर कार्रवाई कर उसे रोके. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उनके अधिकारी व कर्मचारी वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलते हीं नहीं है. एक-दो चेकनाका लगा सिर्फ कौरम पूरा किया जा रहा है. जबकि सच्चाई यह है कि पश्चिम सिंहभूम जिले के लगभग तमाम बालू घाटों, गिट्टी खदानों से अवैध तस्करी व ओवर लोड कर सम्पदाओं को भेजा जा रहा है. एक चलान से तिथि व नम्बर बदल कर कई वाहनों को पार किया जा रहा है. इसे देखने व जांच करने वाला खनन विभाग का कोई अधिकारी क्षेत्र में नहीं दिखता. अवैध बालू घाटों पर छापेमारी तक नहीं कि जाती. यह कार्य वर्षों से जारी है. यदा-कदा पुलिस को भी इसके लिये कार्रवाई करनी पड़ती है. जबकि पुलिस को वैद्य-अवैध चलान की अधिक जानकारी नहीं होती. इसे भी पढ़ें :छिपकली">https://lagatar.in/urvashi-rautela-arrived-at-the-cannes-festival-wearing-a-lizard-necklace-pictures-went-viral/">छिपकली

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खनन विभाग जैसी स्थिति वन विभाग का भी है

[caption id="attachment_639693" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/balu-uthaw-kiriburu-4-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> अवैध बालू का खनन होते हुए.[/caption] सबसे बड़ा सवाल है कि जब जिले के तमाम बालू घाट बंद है तो जिले में लगातार विकास योजनाएं जैसे सड़क, पुल-पुलिया, भवन आदि की निविदा अरबों रुपये का क्यों हो रही है. अगर निविदा व विकास कार्य हो भी रहा है तो बालू कहां से आ रहा है. एमबी बूक बिना चलान के कैसे हो रहा है. निविदा के इस्टिमेट में बालू, गिट्टी, ईट कितने दूरी से उपलब्ध होगा उसका उल्लेख होता है. ऐसे में बालू के लिये कितनी दूरी का उल्लेख हो रहा है. यह सारा मामला विवादों में निरंतर रह रहा है. खनन विभाग जैसी स्थिति वन विभाग का भी है. सारंडा समेत पश्चिम सिंहभूम जिले के तमाम वन प्रमंडल वेंटीलेटर पर. पदाधिकारियों व वनकर्मियों की भारी कमी की वजह से सारंडा, कोल्हान, पोड़ाहाट आदि वन प्रमंडलों के जंगल को माफियाओं से बचाना मुश्किल हो गया है. सारंडा वन प्रमंडल के अधीन चार रेंज जिसमें ससंग्दा (किरीबुरू), गुआ, कोयना (मनोहरपुर), समता (जराईकेला) लंबे समय से रेंजर विहिन हैं. इन रेंजों का प्रभार कोल्हान वन प्रमंडल के रेंजरों को सौंपा गया है. पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रमंडलों के लिए छह डीएफओ की जरूरत है. इसमें से मात्र तीन डीएफओ हैं. सारंडा वन प्रमंडल में डीएफओ का पद 31 जनवरी के बाद से प्रभारी डीएफओ के भरोसे चल रहा है. इस जिले के सभी वन प्रमंडलों व अन्य इकाइयों में वर्तमान में एसीएफ व रेंजर की संख्या मात्र छह है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-villagers-of-kandra-submitted-memorandum-to-dc-demanded-a-ban-on-pollution/">आदित्यपुर

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दर्जनों फर्नीचर उद्योग खुलेआम चल रहा

जमशेदपुर एवं चाईबासा में सीएफ स्तर पर कोई पदाधिकारी नहीं है. जमशेदपुर के डीएफओ हीं दोनों जिलों के सीएफ पद का प्रभार संभाल रहे हैं. जहां तक सारंडा वन प्रमंडल की बात है तो यहां कम से कम एक डीएफओ, एसीएफ, चारों रेंज में एक-एक रेंजर, प्रत्येक रेंज में 3-4 फॉरेस्टर एवं 72 वनरक्षी होने चाहिए. लेकिन वर्तमान में यहां एक भी डीएफओ, एसीएफ, रेंजर, फॉरेस्टर नहीं हैं. 72 वनरक्षी की जगह मात्र 40 वनरक्षी हैं. वन विभाग सिर्फ ठेकेदारी कार्य अर्थात विभागीय स्तर से संचालित योजनाओं का ठेकेदार बन कार्य कराने व पैसा की बंदरबांट में लगी है. इससे विभाग में आपसी गुटबाजी व आक्रोश भी चरम पर है. इसी का फायदा लकड़ी माफिया उठाते हुये सारंडा व कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र के जंगलों से छोटे-बडे़ वाहनों से जेटेया, जगन्नाथपुर, डांगोवावापोसी के रास्ते लकड़ी की तस्करी कर मझगांव, जगन्नाथपुर व ओडिशा निरंतर भेज रहे हैं. जगन्नाथपुर में दर्जनों फर्नीचर उद्योग खुलेआम चल रहा है. लकड़ी तस्करी को रोकने के लिये भी पुलिस को हीं समय-समय पर कार्रवाई करनी पड़ती है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-restoration-of-assistant-professors-through-jet-and-preparation-for-enrollment-in-phd/">जमशेदपुर

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अवैध अंग्रेजी शराब का कारोबार फलफूल रहा

उत्पाद विभाग भी अवैध शराब कारोबार को रोकने में निरंतर असफल साबित हो रहा है. इसके खिलाफ भी पुलिस जंगलों में संचालित शराब की अवैध भठ्ठियों को तोड़ने व अवैध अंग्रेजी शराब के कारोबार को खिलाफ निरंतर कार्रवाई कर रही है. जिला पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सल समस्या एवं जनता को सुरक्षा देना है. दोनों कार्य काफी चुनौती भरा है. जिले में नक्सल समस्या चरम पर है. नक्सलियों द्वारा बिछाये गये लैंड माईन में निरंतर ग्रामीण व जवान घायल हो रहे हैं अथवा मारे जा रहे हैं. अंध विश्वास, डायन प्रथा, राजनीतिक व साम्प्रदायिक झगड़े, छोटे-बडे़ अपराधी व उनके अपराध, लूट, चोरी, घरेलू हिंसा, राजनीतिक कार्यक्रम, भूमि विवाद आदि तमाम प्रकार के अपराधिक घटनाओं को न सिर्फ रोकना, बल्कि अपराधियों को गिरफ्तार तथा अनुसंधान कर सही समय पर न्यायालय में भेजना है. सभी कार्यों में असफलता का सीधा आरोप पुलिस पर हीं लगती है. क्योंकि जनता को अब बाकी विभागों पर भरोसा नहीं रह गया है. पुलिस हथियार से लैश है इसलिये जनता को उम्मीद रहती है कि सभी समस्याओं का समाधान पुलिस हीं को करना है. यहीं कारण है कि सबसे ज्यादा आरोप व दाग भी पुलिस के उपर लगता है. इसे भी पढ़ें :छिपकली">https://lagatar.in/urvashi-rautela-arrived-at-the-cannes-festival-wearing-a-lizard-necklace-pictures-went-viral/">छिपकली

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