Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा में भाकपा माओवादी नक्सली एक बार पुनः नये सिरे से अपना संगठन को खड़ा करने की तैयारी में लग गये हैं. एशिया का सबसे बड़ा सारंडा जंगल वर्ष 2001 से 2011 तक नक्सलियों का राजधानी रहा था. वर्ष 2011 में पुलिस ने लगभग एक माह तक ऑपरेशन ऐनाकोंडा चलाकर सारंडा से नक्सलियों को भगाने में सफलता प्राप्त की थी. उसके बाद सारंडा से तो नक्सलियों का स्थायी व अस्थायी कैंप तो पूरी तरह से खत्म हो गया, लेकिन नक्सली आज भी ओडिशा व झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आने-जाने के लिए सारंडा जंगल का इस्तेमाल कॉरिडोर के रूप में लगातार करते आ रहे हैं. सारंडा से भागकर नक्सलियों ने अपना नया आशियाना कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्रों के घने जंगलों में बना लिया हैं. [caption id="attachment_764753" align="aligncenter" width="600"]
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alt="" width="600" height="400" /> नक्सली नेता मिसिर बेसरा व अन्य का भूमिगत बंकर[/caption] इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/doctors-strike-continued-till-noon-in-giridih-hospitals-emergency-services-restored/">गिरिडीह
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फिर से आशियाना बनाने की फिराक में है नक्सली
कोल्हान जंगल के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस व सीआरपीएफ दर्जनों कैंप स्थापित कर चुकी है और धीरे-धीरे अपनी पकड़ नक्सलियों के खिलाफ मजबूत कर रही है. पुलिस व नक्सलियों के बीच निरंतर जारी संघर्ष में दोनों के अलावे सबसे ज्यादा स्थानीय ग्रामीणों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. हालांकि इस दौरान नक्सलियों का सबसे बड़ा भूमिगत बंकर को पुलिस ने ध्वस्त कर नक्सलियों का स्थायी आशियाना को लगभग उजाड़ दिया है. नक्सली अब कोल्हान जंगल में आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्हें यह आभास हो गया है कि जल्द ही पुलिस कोल्हान जंगल से उन्हें खदेड़ कर भगा देगी. क्योंकि नक्सलियों से कोल्हान जंगल स्थित एक बड़े आधार इलाके को पुलिस ने नक्सलियों से छीन लिया है. पहले जैसा ग्रामीणों का सहयोग भी अब नक्सलियों को नहीं मिल रहा है. नक्सली कोल्हान जंगल से भागकर सारंडा जंगल में पुनः अपना आशियाना बनाने की फिराक में हैं. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatsila-opd-of-sub-divisional-hospital-closed-since-morning-opened-at-12-30-pm/">घाटशिला: सुबह से बंद अनुमंडल अस्पताल का ओपीडी दोपहर 12.30 बजे खुला
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