Kiriburu : पूर्व विधायक गुरुचरण नायक व उनके अंगरक्षकों पर भाकपा माओवादियों द्वारा किया गया हमले का उद्देश्य सिर्फ हथियार लूटना व दो जवानों की हत्या कर दहशत फैलाना था या कुछ और मंशा थी. उल्लेखनीय है कि नक्सलियों ने जिस प्रकार से घटना को अंजाम दिया उससे स्पष्ट है कि उनकी मंशा पूर्व विधायक की हत्या करना नहीं बल्कि जवानों की हत्या करना था. भारी भीड़ की मौजूदगी में कर उनके एके-47 हथियार लूट लेना था. ऐसा कर वे ग्रामीणों में दहशत फैलाना चाहते थे. ऐसा कर वे लोग ग्रामीणों को नक्सलियों के बारे में कोई भी सूचना पुलिस तक पहुंचाने डराना चाहते हैं. ग्रामीणों में यही भय पैदा करने के लिए कुछ दिन पूर्व दो अलग-अलग घटनाओं में प्रेम सुरीन और बोयराम लोम्गा की हत्या पुलिस मुखबिर के आरोप में कर दी गई थी. अगर गुरुचरण नायक की हत्या करनी होती तो वे झीलरुवां स्कूल मैदान में कर दिए होते, या फिर इस घटनास्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित उनके पैतृक गांव टुनिया घर पर भी हमला कभी भी कर सकते थे.
: पूर्व विधायक के शहीद अंगरक्षकों का शव रात भर पड़ा रहा घटनास्थल पर, सुबह पहुंची पुलिस इस गिरफ्तारी के बाद से नक्सली पता लगाने में जुटे है कि उनकी सूचना आखिर कहां से और कैसे लीक हुई. कहीं सोनुवा व गोईलकेरा थाना क्षेत्र के उनके करीबी लोग तो इसे पुलिस एसपीओ के माध्यम से लीक तो नहीं करवाए हैं. इन्हीं वजहों से वे अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बाहरी लोगों की गतिविधियों को बंद या कम करने और पुलिस एसपीओ का सफाया करने में लगे हैं.
नक्सली एसपीओ का सफाया करने के लिए दे रहे ऐसी घटनाओं को अंजाम
उल्लेखनीय है कि भाकपा माओवादी के पूर्वी रीजनल ब्यूरो के सचिव सह पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा, उनकी पत्नी शीला मरांडी और चार माओवादियों को गिरफ्तार किया गया था. वे सभी पारसनाथ पहाड़ी से स्कार्पियो कार से सारंडा-कोल्हान जंगल जा रहे थे. 12 नवंबर को सरायकेला जिला के कांड्रा थाना क्षेत्र अन्तर्गत गिद्दीबेड़ा टोल प्लाजा के पास उन्हें गिरफ्तार किया गया था. वे लोग पश्चिम सिंहभूम जिला अन्तर्गत सीमावर्ती सारंडा व कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र के जंगल में आयोजित को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में शामिल होने जा रहे थे. कोल्हान क्षेत्र में भाकपा माओवादी संगठन के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ था. प्रशांत बोस, उनकी पत्नी शीला मरांडी के अलावे चार अन्य नक्सलियों में वीरेंद्र हांसदा, राजू टुडू, कृष्णा बाहंदा, गुरुचरण बोदरा पकडे़ गए थे. इस गिरफ्तारी के दौरान प्रशांत बोस के वाहन से सोनुवा थाना अन्तर्गत नक्सल प्रभावित एक गांव की गरीब महिला व उसका बच्चा भी पकड़े गए थे, जिसे पुलिस ने छोड़ दिया था, क्योंकि नक्सली उसे दबाव बनाकर इसलिये भेजे थे कि पुलिस को चकमा दिया जा सके कि वाहन से कोई सामान्य परिवार जा रहा है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-the-dead-body-of-the-martyrs-bodyguards-of-the-former-mla-was-lying-on-the-spot-overnight-police-arrived-in-the-morning/">चाईबासा: पूर्व विधायक के शहीद अंगरक्षकों का शव रात भर पड़ा रहा घटनास्थल पर, सुबह पहुंची पुलिस इस गिरफ्तारी के बाद से नक्सली पता लगाने में जुटे है कि उनकी सूचना आखिर कहां से और कैसे लीक हुई. कहीं सोनुवा व गोईलकेरा थाना क्षेत्र के उनके करीबी लोग तो इसे पुलिस एसपीओ के माध्यम से लीक तो नहीं करवाए हैं. इन्हीं वजहों से वे अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बाहरी लोगों की गतिविधियों को बंद या कम करने और पुलिस एसपीओ का सफाया करने में लगे हैं.
Leave a Comment