Kiriburu (Shailesh Singh) : डीएमएफटी निधि से निर्माणाधीन नोवामुंडी प्रखंड का पेयजल ग्रामीण जलापूर्ति योजना भारी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. 85 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी आज तक किसी भी ग्रामीण के घर में पानी नहीं पहुंचा. इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग सरकार से की जायेगी. उक्त बातें पूर्व मंत्री सह भाजपा के वरिष्ठ नेता बड़कुंवर गागराई ने सेल की मेघालया गेस्ट हाऊस में लगातार न्यूज से बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि 85 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद अब एक बार फिर संवेदक ने 14 करोड़ रुपये का री-स्टिमेट का प्रस्ताव विभाग को भेजा है. इससे साफ है कि डीएमएफटी फंड में प्रशासनिक अधिकारी, जन प्रतिनिधि एवं संवेदकों की तिकड़ी मिलकर लूट मचाई हुई है. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-martyrdom-day-of-king-arjun-singh-of-podahat-celebrated/">चक्रधरपुर
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क्षेत्र के पिछड़ने के लिए कोड़ा दंपती जिम्मेदार
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि इस जिले की सारी खादानें सारंडा जंगल में स्थित है. सभी खदान प्रबंधन प्रतिवर्ष अपने क्षेत्र के प्रभावित गांवों के विकास हेतु डीएमएफटी निधि में अरबों रुपये देती है. उसके बावजूद सारंडा के गांवों के ग्रामीण मुलभुत सुविधाओं से वंचित है. इसके लिये मुख्य रूप से जिम्मेदार कोड़ा दंपती हैं. मधु कोड़ा एवं गीता कोड़ा पिछले 20 वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इसके बावजूद यह क्षेत्र इतना क्यों पिछड़ा है. यह सवाल सारंडा की जनता को भी कोड़ा दंपती से पुछने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मिलकर फर्जी ग्रामसभा करा कर योजनाओं के नाम पर पैसों को लूट रहे हैं. इस मामले की जांच के लिए सरकार से मांग की जायेगी. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-female-advocate-injured-after-being-hit-by-a-pickup-van-the-driver-fled-leaving-the-vehicle/">जमशेदपुर: पिकअप वैन के धक्के से महिला अधिवक्ता घायल, वाहन छोड़ भागा चालक
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