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किरीबुरू : सारंडा में संचालित एनआरबीसी केन्द्र का एस्पायर संस्था के पदाधिकारियों ने किया दौरा

Kiriburu (Shailesh Singh) : नक्सल प्रभावित क्षेत्र सारंडा जंगल स्थित रांगरिंग, चेरवालोर एंव टोयबो में एस्पायर संस्था द्वारा संचालित एनआरबीसी केन्द्र का अवलोकन संस्था के पदाधिकारियों ने किया. सोमवार को गांव आगमन पर ग्रामीणों ने सभी का पारंपरिक रूप से स्वागत किया. सभी ने बच्चों से मिलकर शिक्षा व शिक्षकों से मिलने वाली टास्क के बारे में बच्चों से चर्चा की. टीम में  एस्पायर संस्था के सचिव दयाराम, आईएएस शेखर भानु राव (नीति आयोग के निदेशक  जेनेरल), स्मिता अग्रवाल (एजुकेशन डायरेक्टर) टाटा स्टील के प्रवीण कुमार, एस्पायर के जिला समन्वयक नरेश, जोनल समन्वयक अरबी रमन, राजेश लागुरी, हरिराम तिर्की व नोवामुंडी प्रखंड समन्वयक आर बी रमन शामिल थे. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-kajal-gupta-in-group-a-of-karate-competition-and-vaibhav-tejas-in-group-b-became-the-winner/">नोवामुंडी

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[caption id="attachment_396151" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/kiriburu-meeting-1.jpeg"

alt="" width="600" height="400" /> ग्रामीणों संग बैठक करते एनआरबीसी के पदाधिकारी[/caption]

समस्याओं से हुए अवगत

मालूम हो कि रांगरिंग गांव के एनआरबीसी जिसके माध्यम से 126 बच्चों को विद्यालय से जोड़ा गया है. वहीं, चेरवालोर के एनआरबीसी के माध्यम से 45 बच्चे और मनोहरपुर प्रखंड के टोयबो में 32 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. इस दौरान ग्रामीणों ने पदाधिकारियों को स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया. जिसमें सड़क, बिजली, राशनकार्ड, विद्यालय, आंगनबाड़ी, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा आदि समस्या शामिल थी. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-kajal-gupta-in-group-a-of-karate-competition-and-vaibhav-tejas-in-group-b-became-the-winner/">नोवामुंडी

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क्षेत्र में है सुविधाओं का अभाव

रांगरिंग स्थित एनआरबीसी केंद्र में रांगरिंग और बोड़दाभठ्ठी के ग्रामीणों के साथ बैठक किया गया. बैठक में बच्चों की स्थिति के बारे में चर्चा किया गया. रांगरिंग के मुंडा विजय अँगरिया ने कहा कि वर्ष 1980 में हमारे पूर्वज रांगरिंग में मेघाहातुबुरु खादान का डैम बनाने आये थे एवं यहीं गांव बनाकर बस गयें. 40 वर्ष बाद भी हमारे गांव में सरकारी सुविधा आज तक नहीं पहुंची है. हमारे बच्चे शिक्षा से वंचित थे. 2 अक्टूबर 2019 को एस्पायर संस्था ने ग्रुप सर्वेक्षण कर विद्यालय से दूर बच्चों का आंकड़ा संग्रह कर हमारे गांव में एनआरबीसी केंद्र की शुरुवात की तब जाकर हमारे गांव के लोंगो को शिक्षा का महत्व के बारे जानकारी मिली. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-deputy-commissioner-flagged-off-the-reading-campaign/">चाईबासा

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आठ किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते है बच्चे

उन्होंने बताया कि तीनों गांव के ग्रामीणों ने ग्राम सभा कर पढ़ने के सेंटर निर्माण किए जाने का निर्णय लिया था. इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर मकान का निर्माण किया. उन्होंने कहा कि एनआरबीसी से पढ़ कर निकले बच्चों का नामांकन किरीबुरु-मेघाहातुबुरु के स्कूलों में कराया गया है. बच्चों को विद्यालय के समय अनुसार विद्यालय जाने के लिए तैयार होना पड़ता है. बच्चों को सुबह 2 बजे उठकर विद्यालय जाने के तैयार होते है. बच्चे आठ किलोमीटर पैदल चलकर जंगली जानवरों से बचते हुए मेघाहातुबुरु खादान क्षेत्र में जाते हैं. वहाँ से सेल की बस से किरीबुरु एंव मेघाहातुबुरु स्थित विद्यालय जाते है. इससे बच्चों को काफी परेशानी होती है. इसके बाद अधिकारियों ने चेरवालोर एंव टोयबो के ग्रामीणों के साथ बैठक की. [wpse_comments_template]

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