alt="" width="600" height="400" /> बच्चों को सारंडा जंगल के जुम्बईबुरु में पढ़ाते सीआरपीएफ के पदाधिकारी व जवान.[/caption] इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-bike-rider-injured-in-road-accident-near-nilachal-company/">आदित्यपुर
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पहले यहां 197वीं बटालियन तैनात थी
उल्लेखनीय है कि सारंडा जंगल के जुम्बईबुरु में सीआरपीएफ 26वीं बटालियन के जवान एक माह पूर्व हीं बोकारो से आए हैं. इससे पहले यहां 197वीं बटालियन तैनात थी. सीआरपीएफ-26वीं बटालियन के पदाधिकारी व जवान सारंडा जंगल की भौगोलिक स्थिति से अभी पूरी तरह से परिचित नहीं हैं. इसके बावजूद वह नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित कर उनके प्रभाव व आधार क्षेत्र को खत्म करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं. अपने मूल जिम्मेदारी व कार्य से बचे समय का इस्तेमाल वह सारंडा के गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने हेतु कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-contracted-mercury-medical-workers-association-submitted-memorandum-to-the-mla/">चाकुलिया: अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ ने विधायक को सौंपा ज्ञापन
शिक्षा के लिए नहीं है गांव में स्कूल
सीआरपीएफ के पदाधिकारी यह जानते हैं कि नक्सली सारंडा के गरीब व अशिक्षित बच्चों को गुमराह कर उन्हें अपने दस्ते में शामिल कर उनका भविष्य बर्बाद करते हैं. सारंडा के जुम्बईबुरु, धर्नादिरी, चेरवालोर, बालेहातु जैसे गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल नहीं हैं. यहां के बच्चे दूसरे गांवों में स्थित स्कूलों में पढ़ने कई किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं. ऐसी विकट स्थिति को देखते हुए सीआरपीएफ के कंपनी कमांडर सुबीर कुमार मंडल ने अपने सहयोगी जवानों के साथ कैंप के बगल में हीं जमीन पर दरी बिछाकर उक्त गांव के बच्चों को बुलाकर शिक्षा उपलब्ध कराना प्रारम्भ किया है. सीआरपीएफ के इस कार्य से उक्त गांवों के ग्रामीण व बच्चों के अभिभावक भी काफी खुश हैं. क्योंकि उनके बच्चों को अब प्रारम्भिक शिक्षा एवं अनुशासन मिलना प्रारम्भ हो गया है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/will-make-jamshedpur-a-safety-secure-city-prabhat-kumar/">जमशेदपुरको सेफ्टी सिक्योर सिटी बनायेंगे- प्रभात कुमार

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