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किरीबुरू : सारंडा के गरीब बच्चों को शिक्षित करने में जुटे सीआरपीएफ-26वीं बटालियन के पदाधिकारी व जवान

Kiriburu (Shailesh Singh) : हथियार पकड़ाकर गरीब नौनीहालों को अपराध व नक्सल के रास्ते पर धकेलना आसान है. लेकिन वहीं बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा कर उसके भविष्य को बेहतर बनाना काफी कठिन है. घोर नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल के जुम्बईबुरु में तैनात सीआरपीएफ-26वें बटालियन के एफ कम्पनी के कंपनी कमांडर सुबीर कुमार मंडल के नेतृत्व में जवानों ने दोहरी लड़ाई प्रारम्भ कर दी है. पहली लड़ाई नक्सलियों के खिलाफ, जबकि दूसरी लड़ाई अशिक्षा के खिलाफ. [caption id="attachment_540396" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/Kiriburu-Naxal-1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> बच्चों को सारंडा जंगल के जुम्बईबुरु में पढ़ाते सीआरपीएफ के पदाधिकारी व जवान.[/caption] इसे भी पढ़ेंआदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-bike-rider-injured-in-road-accident-near-nilachal-company/">आदित्यपुर

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पहले यहां 197वीं बटालियन तैनात थी

उल्लेखनीय है कि सारंडा जंगल के जुम्बईबुरु में सीआरपीएफ 26वीं बटालियन के जवान एक माह पूर्व हीं बोकारो से आए हैं. इससे पहले यहां 197वीं बटालियन तैनात थी. सीआरपीएफ-26वीं बटालियन के पदाधिकारी व जवान सारंडा जंगल की भौगोलिक स्थिति से अभी पूरी तरह से परिचित नहीं हैं. इसके बावजूद वह नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित कर उनके प्रभाव व आधार क्षेत्र को खत्म करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं. अपने मूल जिम्मेदारी व कार्य से बचे समय का इस्तेमाल वह सारंडा के गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने हेतु कर रहे हैं. इसे भी पढ़ेंचाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-contracted-mercury-medical-workers-association-submitted-memorandum-to-the-mla/">चाकुलिया

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शिक्षा के लिए नहीं है गांव में स्कूल

सीआरपीएफ के पदाधिकारी यह जानते हैं कि नक्सली सारंडा के गरीब व अशिक्षित बच्चों को गुमराह कर उन्हें अपने दस्ते में शामिल कर उनका भविष्य बर्बाद करते हैं. सारंडा के जुम्बईबुरु, धर्नादिरी, चेरवालोर, बालेहातु जैसे गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल नहीं हैं. यहां के बच्चे दूसरे गांवों में स्थित स्कूलों में पढ़ने कई किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं. ऐसी विकट स्थिति को देखते हुए सीआरपीएफ के कंपनी कमांडर सुबीर कुमार मंडल ने अपने सहयोगी जवानों के साथ कैंप के बगल में हीं जमीन पर दरी बिछाकर उक्त गांव के बच्चों को बुलाकर शिक्षा उपलब्ध कराना प्रारम्भ किया है. सीआरपीएफ के इस कार्य से उक्त गांवों के ग्रामीण व बच्चों के अभिभावक भी काफी खुश हैं. क्योंकि उनके बच्चों को अब प्रारम्भिक शिक्षा एवं अनुशासन मिलना प्रारम्भ हो गया है. इसे भी पढ़ेंजमशेदपुर">https://lagatar.in/will-make-jamshedpur-a-safety-secure-city-prabhat-kumar/">जमशेदपुर

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आज के बच्चे कल का नागरिक और भविष्य निर्माता हैं

कंपनी कमांडर सुबीर कुमार मंडल ने बताया कि आज का बच्चा कल का नागरिक और भविष्य का निर्माता है. फिर बच्चों को उनके अधिकारों से क्यों वंचित रखा जाए. क्यों न उनमें प्रेम व स्नेह का संचार किया जाए. क्यों न उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने का साधन प्रदान किया जाए. उन्होंने कहा कि हम अपने कार्यों से समय निकालकर इन बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के अलावे शिक्षा सामग्री जैसे कॉपी, पेंसिल, किताब आदि भी देने का कार्य कर रहे हैं. बच्चे शिक्षित होंगे तो वह गलत रास्ते पर नहीं जाकर अपने बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ाएंगे. हम सबका भी यही उद्देश्य है. यह एक छोटी सी प्रयास है. इसे आगे भी जारी रखने की कोशिश किया जाएगा. इस कार्य में अभिभावकों व ग्रामीणों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है. [wpse_comments_template]

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