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किरीबुरु : 6 फरवरी की रात कोल्हान जंगल से सारंडा जंगल में प्रवेश किया नक्सलियों का एक दस्ता

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Kiriburu (Shailesh Singh) : भाकपा माओवादी नक्सलियों का एक हथियारबंद दस्ता 6 फरवरी की मध्य रात्रि कोल्हान जंगल से सारंडा जंगल में प्रवेश किया. विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बीते दिनों नक्सलियों ने बुरु राईका निवासी चुडू़ सिरका की हत्या पुलिस मुखबिर होने के आरोप में गोली मार कर दी थी. उसके बाद उक्त क्षेत्र मे पुलिस, सीआरपीएफ व कोबरा बटालियन द्वारा नक्सलियों के खिलाफ निरंतर आपरेशन चलाया जा रहा है. पुलिस की दबीस के कारण हीं संभवतः नक्सली कोल्हान जंगल सीमा से कारो नदी को पार कर सारंडा जंगल में 6 फरवरी की रात प्रवेश किये हैं. सूत्रों का कहना है कि दर्जनों नक्सलियों को 6 फरवरी की रात लगभग 11-12 बजे घाटकुड़ी, काशिया-पेचा गाँव क्षेत्र के जंगलों से गुजरते देखा गया. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/baharagora-ramlal-hathi-broke-iron-latch-and-ate-grains-from-five-houses/">बहरागोड़ा

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यह नक्सली आगे किधर गये, उसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. ऐसे भी सारंडा को नक्सलियों से मुक्त कराने हेतु सीआरपीएफ, झारखण्ड पुलिस व कोबरा बटालियन की कई कंपनी छोटानागरा एवं जराईकेला थाना क्षेत्र के विभिन्न जंगलों में पिछले डेढ़ माह से जंगल में अस्थाई कैंप स्थापित कर शरण ली हुई है. उक्त जवान सारंडा के कोलायबुरु, उसरुईया, कुदलीबाद, बालिबा, तिरिलपोशी आदि क्षेत्र के जंगलों में कैंप कर निरंतर सर्च अभियान नक्सलियों के खिलाफ चला रहे हैं. इसे भी पढ़ें : IAS">https://lagatar.in/vinod-singh-worked-not-only-for-ias-shashi-ranjan-but-many-other-bureaucrats/">IAS

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ऐसी स्थिति में नक्सलियों के लिये सारंडा का कोई भी क्षेत्र अभी सुरक्षित नहीं बचा हुआ है. सिर्फ गुआ थाना क्षेत्र का घाटकुडी़, गुआ खदान का पीछे का जंगल, छोटानागरा थाना अन्तर्गत काशिया-पेचा, बहदा, कुमडीह क्षेत्र का जंगल मामूली रूप से सुरक्षित है लेकिन इस जंगल में भी नक्सली किसी भी स्थान पर एक-दो दिन से अधिक शरण नहीं ले सकते हैं. इससे अधिक ठहरने पर उनको पुलिस घेराबंदी के रुप में भारी खतरा का सामना करना पड़ सकता है. [wpse_comments_template]  

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