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किरीबुरु : ईसाई समुदाय के लोगों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया ईस्टर संडे

Kiriburu :  ईसाई समुदाय के लोगों ने गुड फ्राइडे के बाद मनाये जाने वाले पहले संडे को ईस्टर संडे के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया. समुदाय के लोगों ने अहले सुबह कब्रिस्तान में जाकर अपने पूर्वजों के कब्र पर मोमबत्तियां जलायीं और प्रभु यीशु व अपने पूर्वजों को याद किया. प्रभु यीशु के जीवित होने की खुशी में एक-दूसरे को बधाईयां भी दी. विदित हो कि लोग गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह के बलिदान को याद कर दुखी होते हैं तो वहीं ईस्टर संडे को लोग खुशी मनाते हैं. मालूम हो कि ईसाई धर्म के लोगों का मानना है कि गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गये थे. इसके बाद से ही ईसा मसीह के जीवित होने की खुशी में ईसाई समुदाय के लोगों द्वारा ईस्टर संडे मनाया जाता हैं. इसे भी पढ़े : राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhi-said-not-five-40-lakh-people-died-due-to-corona-said-modi-is-lying/">राहुल

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[caption id="attachment_291528" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/graveyard-kiriburu.jpg"

alt="" width="600" height="339" /> प्रार्थना करते लोग.[/caption]

ईस्टर संडे को माना जाता है बदलाव का भी दिन

दुनिया को प्रेम, शांति और करुणा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को उस समय के धार्मिक कट्टरपंथी ने रोम के शासक से शिकायत करके उन्हें सूली पर लटका दिया था. इस वजह से ईसाई धर्म के लोग गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हैं. लेकिन कहा जाता है कि प्रभु यीशु इस घटना के तीन दिन बाद यानी ईस्टर संडे के दिन पुनः जीवित हो उठे थे. इसलिए ईस्टर संडे को बदलाव का भी दिन माना जाता है. साथ ही ऐसा माना जाता है कि ईशा मशीह के जीवित होने के बाद उनको यातनाएं देने वाले और सूली पर चढ़ाने वाले लोगों को भी बहुत पश्चाताप हुआ था. इसे भी पढ़े : धनबाद">https://lagatar.in/accident-near-bada-gurdwara-in-topchanchi/">धनबाद

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