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किरीबुरु : चिड़िया पंचायत में छह साल में भी पूरी नहीं हुई दो करोड़ की योजना

Lagatar Correspondent kiriburu (chaibasa): सारंडा अविभाजित बिहार के समय से ही भ्रष्टाचारी अधिकारियों व ठेकेदारों का चारागाह रहा है. जिसे बडे़ पैमाने पर विकास योजनाओं में लूट करना होता है, वह सारंडा में ठेका लेता है. सारंडा का पुराना इतिहास रहा है कि यहां कई योजनायें धरातल पर बिना उतारे ही कागजों में फाइनल कर पैसे की निकासी कर ली गई. ऐसी योजनाओं में पुल-पुलिया, चेकडैम, तालाब, कच्ची सड़क आदि शामिल है. दर्जनों योजनाएं धरातल पर उतारने का प्रयास हुआ लेकिन सिर्फ जमीन छेंकने के सिवाय आज तक पूर्ण नहीं हुआ. ऐसी ही योजनाओं में से एक है सारंडा के चिड़िया पंचायत के बिनुआ, लोड़ो एवं अंकुआ गांव में शुद्ध पेयजल के साथ-साथ सिंचाई की सरकारी योजना. यह दो करोड़ की लागत से पूरी करनी है. काफी रुपये खर्च करने के बावजूद नक्सल प्रभावित मनोहरपुर प्रखंड एवं चिड़िया पंचायत अन्तर्गत उक्त तीनों गांवों में 6 साल बाद भी एक बूंद पानी नहीं पहुंच सका है. यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. इसके अब पूर्ण होने की संभावना नहीं दिखती है. काम अधूरा छोड़ ठेकेदार फरार हैं, जिससे तीनों गांवों के ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है.
  • सरकारी योजनाओं का लूट का केन्द्र रहा सारंडा
  • चिड़िया पंचायत का सिंचाई व पेयजल योजना आखिर कब पूर्ण होगी!

2017-17 में शुरू हुई थी योजना

बिनुआ गांव के ग्रामीण अमर सिंह सिद्धू, पूर्ण चन्द्र चेरवा, चुम्बरु चेरवा आदि ने शुभम संदेश को बताया कि वर्ष 2016-17 में यह कार्य प्रारम्भ हुआ. इस कार्य को करने वाला जमशेदपुर के ठेकेदार जीतू सिंह, पांडेय एवं यादव थे. ठेकेदारों ने उन्हें बताया था कि बिनुआ, लोड़ो एवं अंकुआ गांव में शुद्ध पेयजल एवं कृषि कार्य हेतु पानी, बिनुआ गांव के समीप बागुन कोचा नाला से चेकडैम का निर्माण कर तथा 3 किलोमीटर लंबी पानी पाइप लाइन बिछाकर पानी पहुंचाना है. यह कार्य 2 करोड़ की लागत से माईनर एरिगेशन विभाग से स्वीकृत हुआ था. इसके लिये बागुन कोचा नाला पर चेकडैम का अधूरा निर्माण, बिनुआ में काफी कम गड्ढा वाला दो बड़ा अधूरा तालाब, एक तालाब में अधूरा कंक्रीट-सीमेंट का बड़ा पानी का टंकी, अंकुआ में एक अधूरा तालाब का निर्माण के अलावे कुछ स्थानों पर गड्ढा खोद प्लास्टिक का मोटा पाइप डाला गया था. जितनी पाइप बिछायी गयी थी, उसमें कुछ स्थानों पर आग लगने से पाइप जल गया और कुछ पाइप पानी की बहाव में उखड़कर जहां-तहां बिखरा पड़ा है. अब तक इतना ही कार्य हुआ है और ठेकेदार फरार है. किसी भी गांव में एक बूंद पानी नहीं पहुंचा है.

बिना मुआवजा दिये ली भूमि

इस योजना हेतु बिनुआ गांव में पहला तालाब निर्माण हेतु लोबो चेरवा, जोंको बोयपाई एवं चन्द्रमोहन चेरवा, दूसरा तालाब हेतु चुम्बरु चेरवा एवं चन्द्रमोहन चेरवा तथा अंकुआ स्थित तीसरा तालाब हेतु स्व. सदानंद सोय की दर्जनों एकड़ रैयत भूमि बिना किसी पैसा व मुआवजा का लिया गया. इनके जमीन पर लगभग तीन फीट गड्ढा जेसीबी मशीन से खोदकर उसी का मिट्टी निकाल चारों तरफ मेड़ बना तालाब का रूप दिया गया. जबकि तालाब की गहराई कमसे कम 10 फीट गहरा खोदा जाना चाहिए था. जमीन मालिक चन्द्रमोहन चेरवा ने बताया की तालाब गहरा खोदा गया होता तो हम कमसे कम उसमें मछली पालन कर रोजगार प्राप्त कर सकते थे. लेकिन अब हमारा यह जमीन न हमारे किसी काम आया और न हीं उक्त योजना से समस्त ग्रामीणों को लाभ पहुंचा.

योजना से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगाया गया

पूरे कार्य योजना क्षेत्र में घूमकर शुभम संदेश संवाददाता ने पड़ताल की तो पाया कि कहीं भी इस योजना से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगा है, जिससे यह जानकारी मिल सके कि यह योजना किस वित्त वर्ष में प्रारम्भ हुआ. कार्य कब खत्म होगा, किस विभाग से बनाया जा रहा है, इसका उद्देश्य क्या है, कितने की प्राक्कलन राशि इस योजना पर खर्च होनी थी, किन-किन गांवों में योजना का पानी पहुंचाया जाना था, कितनी दूर तक पानी पाइप लाइन बिछाया जाना था आदि अनेक सवाल का जबाब न तो हमें मिल पाया और न ही ग्रामीणों के पास था. ग्रामीणों द्वारा इस कार्य को कराने वाले जमशेदपुर के एक ठेकेदार पांडेय जी का दिये गये नम्बर पर सम्पर्क किया गया तो उसने फोन नहीं उठाया. जिससे इस योजना के बाबत, तथा इसमें हुई भारी भ्रष्टाचार की जानकारी मिल सके.

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