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किरीबुरु : ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता के भ्रष्ट कार्यशैली से योजनाएं लटकीं

Kiriburu (Shailesh Singh) : ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता राजीव लोचन की भ्रष्ट कार्य शैली ने राज्य के सभी राज्यस्तरीय योजनाओं की निविदा का निष्पादन अधर में लटका दिया है. इस संबंध में बीते दिन विभागीय समीक्षा बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह ने 10 दिन के अंदर सभी निविदाओं का तुलनात्मक विवरणी (सीएस) पेश करने के निर्देश दिए हैं. वहीं प्रधान सचिव ने समीक्षा बैठक की विभागीय तैयारी ठीक से नहीं किए जाने पर विभागीय अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की. इसे भी पढ़ें : चीनी">https://lagatar.in/chinese-ambassador-appealed-to-strengthen-bilateral-relations-with-india/">चीनी

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गौरतलब है कि पूर्व मुख्य अभियन्ता वीरेन्द्र राम की घटना के बाद भी मुख्य अभियंता के कार्यालय में बिना कमीशन के कोई सीएस नहीं हो रहा है. जानकारी के अनुसार मुख्य अभियंता राजीव लोचन मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और विशेष मरम्मत कार्य का सीएस अनुमोदन में भारी विलम्ब कर रहे हैं. समय पर सीएस अनुमोदन नहीं होने से अनेक विकास योजनाओं का कार्य अधर में लटका हुआ है. उनके द्वारा समय पर सीएस अनुमोदन कार्य नहीं किया जाना भी भ्रष्टाचार का द्योतक है. अब तो हालत यह हो गया है कि कुछ माननीय लोग लोचन की दरबारी कर के अपनी योजनाओं को विभाग में भेजवाने का आग्रह कर रहे हैं. जब तक एक सक्षम और योग्य अभियंता को पूर्ण रूप से मुख्य अभियंता के पद पर पदस्थापित नहीं किया जाता है, तब तक इस पद से तीव्र गति से कार्य संचालन की उम्मीद नहीं की जा सकती है. विदित हो कि विगत एक वर्ष से अर्थात वीरेंद्र राम के भ्रष्टाचार मामले में जेल जाने के बाद से ग्रामीण कार्य विभाग की योजना ठप पड़ गयी है. वीरेन्द्र राम के जेल जाने के बाद भी मुख्य अभियंता कार्यालय में भ्रष्टाचार और कमीशन का खेल बंद नहीं हुआ है. इसे भी पढ़ें : ISIS">https://lagatar.in/isis-jharkhand-module-terrorist-rahul-sen-alias-umar-interrogated-by-nia/">ISIS

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उल्लेखनीय है कि ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी राजीव लोचन जिन्हें जेल में होना चाहिए, उन्हें पदोन्नति देकर प्रभारी मुख्य अभियन्ता बना दिया गया है. झारखंड सरकार एवं विभागीय मंत्रालय राजीव लोचन पर इतना मेहरबान क्यों है, यह बड़ा सवाल है. राजीव लोचन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, रांची ने सात अप्रैल 2017 को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया था. इसकी जांच अभी भी जारी है. बताया जाता है कि राजीव लोचन के खिलाफ कई बार वारंट जारी हो चुका है. लेकिन वह अपनी ऊंची पहुंच एवं पैरवी के बल पर मामले को दबा देते हैं. उनकी नौकरी कुछ माह और बचे हैं, जबकि विभाग में कई ऐसे उच्च अधिकारी हैं जिन पर भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है, जिन्हें मुख्य अभियन्ता नहीं बनाकर भ्रष्टाचार मामले में दागदार अधिकारी को प्रभारी मुख्य अभियन्ता बनाकर भ्रष्टाचार का बढ़ावा दिया जा रहा है. सीएस नहीं होने से राज्य के अनेक ठेकेदार परेशान हैं. [wpse_comments_template]

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