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किरीबुरु : सारंडा में विस्फोट की तेज आवाज के बाद पुलिस, सीआरपीएफ व कोबरा घंटों रहे परेशान

  • विस्फोट कहां और किसने किया स्पष्ट नहीं
Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा जंगल में अहले सुबह लगभग छह-साढे़ छह बजे के बीच 2-3 तेज विस्फोट की आवाज सुनाई देने के बाद से विभिन्न थानों की पुलिस व सारंडा के जंगल में कैंप किये सीआरपीएफ व कोबरा बटालियन के जवानों के बीच खलबली मची रही. उक्त विस्फोट की आवाज सुनने के बाद विभिन्न बटालियन व कम्पनियों के सीआरपीएफ व कोबरा के पदाधिकारी व जवान के अलावे विभिन्न थाना के पुलिस पदाधिकारी एक-दूसरे से सम्पर्क कर इस आवाज को सत्यापित करने के प्रयास में घंटों लगे रहे. लेकिन कहीं से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई. इसे भी पढ़ें : भड़काऊ">https://lagatar.in/maulana-azhari-arrested-from-mumbai-for-giving-inflammatory-speech/">भड़काऊ

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ऐसी चर्चा होती रही है विस्फोट की तेज आवाज सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु या फिर चिड़िया खदान क्षेत्र की जंगलों से आया है. हालांकि घने जंगलों में विस्फोट की आवाज का वास्तविक लोकेशन पता करना काफी कठिन हो जाता है. सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु, चिड़िया, गुआ आदि खदान प्रबंधनें भी लौह अयस्क की पहाड़ को तोड़ने हेतु विस्फोट करती है, लेकिन यह विस्फोट दोपहर के समय किया जाता है. पहले विस्फोट के दौरान तेज आवाजें होती थीं. अब खदान प्रबंधनों ने विस्फोट की तकनीक में बदलाव किया है, जिससे विस्फोट के दौरान आवाज कम तथा पहाड़ी को हिलाकर पत्थर को हल्का किया जाता है. चिड़िया खदान का उत्पादन भी बंद है. इस कारण वहां की खदान में बलास्टिंग नहीं किये जाने की बात कही जा रही है. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/ranchi-section-144-imposed-within-100-meters-of-assembly-complex-on-5-6-february/">रांची

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पिछले लगभग दो माह से सारंडा में अचानक बढ़ी नक्सल गतिविधियां के बाद सारंडा जंगल के कुदलीबाद, उसरुईया, बालिबा, तिरिलपोशी आदि अन्य घने जंगलों में सीआरपीएफ व कोबरा बटालियन के अतिरिक्त जवानों को उतारकर नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन तेज किया गया है. ये जवान जंगल में ही अस्थाई कैम्प लगाकर नक्सलियों के खिलाफ निरंतर आपरेशन चला रहे हैं. स्वाभाविक है कि किसी तेज आवाज के बाद सभी चौंकेंगे एवं यह पता लगाने की कोशिश करेंगे की आवाज कहां से आयी है. कहीं नक्सलियों द्वारा बनाये जा रहे लैंड माइन विस्फोट तो नहीं हुआ, अथवा जवानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से नक्सलियों द्वारा कहीं विस्फोट तो नहीं किया गया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-mango-man-missing-for-two-days-complaint-to-police/">जमशेदपुर

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सीआरपीएफ अथवा कोबरा की बीडीएस टीम भी प्रायः नक्सलियों द्वारा लगाये गये आइईडी को जमीन से सुरक्षित निकालकर जंगल में हीं निष्क्रिय करने हेतु विस्फोट करती है. इसके अलावे ग्रामीण भी पर्व, त्योहार या किसी उत्सव में, या फिर हाथियों को भगाने हेतु ओडि़सा का हैंड मेड तेज आवाज वाले पटाखे का इस्तेमाल करती है. यह पटाखे जंगल में छोडे़ जाने के बाद दूर-दूर तक सुनाई देती है. लेकिन अभी तक प्राप्त जानकारी अनुसार सीआरपीएफ व कोबरा की किसी भी टीम के साथ विस्फोट से संबंधित कोई घटना नहीं हुई है. लेकिन जंगल में विस्फोट की आवाज सुनाई दी है. [wpse_comments_template]

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