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किरीबुरू : सारंडा के काशिया-पेचा गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र का गर्भवती महिलाओं व बच्चों को नहीं मिल रहा लाभ

Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा के सुदूरवर्ती गंगदा पंचायत स्थित काशिया-पेचा गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र होने के बावजूद गांव की गर्भवती महिलाओं व बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. वर्ष 2019 से टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, एलएमपी कार्ड के अलावे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मिलने वाली 6 हजार रूपये की राशी भी इन्हे मुहैया नहीं की गई है. इससे गांव की गर्भवती महिलाओं एंव ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है. काशिया-पेचा गांव निवासी रुईदास सोरेन ने बताया कि गांव स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र में 3-6 वर्ष उम्र तक के 35 बच्चों का खाना नियमित बनता है. इसके अलावे 0-3 वर्ष तक के लगभग 50 बच्चों (कुल 85 बच्चे) का पोषाहार इस केन्द्र द्वारा बच्चों के घर हर माह भेजा जाता है. लेकिन वर्ष 2019 से इस आंगनबाड़ी केन्द्र में कोई भी एएनएम का पदस्थापन नहीं हुआ है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-innerwheel-will-educate-adults-manjari-pasari/">चाईबासा

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alt="" width="533" height="355" /> आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ते बच्चे[/caption]

केन्द्र में सिर्फ सेविका हैं मौजूद

आंगनबाड़ी केंद्र में एएनएम नहीं रहने से गर्भवती महिलाओं का एलएमपी कार्ड नहीं बन पाया है जिससे उनकी स्वास्थ्य, टीकाकरण आदि से संबधित रिकार्ड दर्ज नहीं हो पा रही है. वर्ष 2019 के बाद गर्भवती महिला व नवजात बच्चों का न तो टीकाकरण हो सका है और न ही सरकार से मिलने वाली 6 हजार रूपये भी उन्हें मिला है. ग्रामीणों के अनुसार इस आंगनबाड़ी केन्द्र की सेविका नंदी सुरीन एंव सहिया बालेमा सुरीन है. दोनों बेहतर सेवा तो दे रही है, लेकिन गर्भवती महिलाओं व बच्चों का टीकाकरण व स्वास्थ्य जांच तो एएनएम को ही करना है. सभी ने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले को गंभीरता से लेते हुये केन्द्र में नियमित एएनएम भेजे जाने की मांग की है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा:">https://lagatar.in/chaibasa-prime-ministers-national-apprenticeship-fair-will-be-organized-on-september-12-at-iti/">चाईबासा:

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आंगनबाड़ी केंद्रों पर है गर्भवती महिलाओं व बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी

उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य उद्देश्य 0-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना है. इन केंद्रों में बच्चों का उचित मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव रखने का काम किया जाता है. इन केंद्रों में बाल विकास को ध्यान में रखते हुऐ, बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता है. किसी भी गर्भवती स्त्री के पोषण की भी जिम्मेदारी इन केंद्रों पर निर्भर है. परंतु यहां की व्यवस्था बेहद ही खराब बनी हुई है. [wpse_comments_template]

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