के दो साल बाद भी ”मरांग गोमके” का गांव टकरा नहीं बन सका ‘आदर्श ग्राम’, जिम्मेवार कौन ?
डासा बंद करना अनुच्छेद 14 के भी खिलाफ है
उन्होंने बताया कि खान में दूरस्थता और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण, अधिकारी अपने परिवार को पास के शहरों में रखने और अतिरिक्त खर्च करने के लिए बाध्य हैं. डासा किसी तरह इस अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव की भरपाई कर रहा था, लेकिन अधिकारियों के लिए डासा को बंद करना, न केवल हतोत्साहित करने वाला है, बल्कि प्राकृतिक न्याय और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के भी खिलाफ है. उपर्युक्त आदेश कार्यकारी और गैर-कार्यकारी सेलकर्मियों के बीच खदानों में भेदभाव करता है. भारत सरकार के गृह मंत्रालय हमारे साथ हीं एक खदान में काम कर रहे अपने कर्मचारियों (सीआईएसएफ) को कठिनाई भत्ते का भुगतान कर रहा है. सेल के इतिहास में खदान अधिकारियों के साथ इस तरह का भेदभाव कभी नहीं हुआ. इस मामले में राजसभा सांसद आदित्य प्रसाद साहू ने सेल अधिकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं से इस्पात मंत्री को अवगत कराया जाएगा. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-colonel-kishore-singhs-appointment-to-the-post-of-district-military-officer-lying-vacant-for-years/">आदित्यपुर: वर्षों से रिक्त पड़े जिला सैन्य पदाधिकारी पद पर कर्नल किशोर सिंह की हुई नियुक्ती [wpse_comments_template]

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