Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

किरीबुरू : धधक रहा सारंडा का जंगल, इन्द्र देव पर टिकी निगाहें

Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा जंगल के विभिन्न क्षेत्रों में लगी आग को बुझाना वन विभाग के बस की बात नहीं. पर्यावरण प्रेमी इस आग को बुझाने के लिये भगवान इन्द्र की ओर टकटकी लगाये बिनती कर रहे हैं. आसमान में छाये काले बादल से लोगों को उम्मीद जगी है कि अगर यह बादल बरस जाये तो सैकड़ों एकड़ वन भूमि में लगी आग बुझ जाये. अन्यथा करोड़ों-अरबों रुपये की वन संपदा, वन्यप्राणी जलकर नष्ट हो जायेंगे. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-jmm-leader-bajrang-sonkar-died-due-to-heart-attack/">आदित्यपुर

: झामुमो नेता बजरंग सोनकर की हार्ट अटैक आने से मौत

सारंडा को अब भगवान हीं बचा सकते है

[caption id="attachment_581005" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/jangal-aag-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> आग से उठता धुंआ.[/caption] उल्लेखनीय है कि सारंडा के जंगलों को काटकर उसकी लकड़ियों को जला कर मैदान अथवा खेत बनाया जा रहा है. किरीबुरु-मनोहरपुर मुख्य मार्ग समेत सारंडा के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क के किनारे सैकड़ों छोटे पेड़ों को काट उसमें आग लगा कर असमाजिक तत्वों द्वारा नष्ट कर वन एंव पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है. सारंडा सात सौ पहाड़ियों की घाटी के नाम से हीं नहीं बल्कि विभिन्न प्रजाति के हजारों हरे पेड़-पौधे की श्रृंखला के नाम से भी विख्यात है. यहां की खूबसूरती देखने के लिए बाहरी पर्यटक भारी तादाद में आते थे. लेकिन जंगलो में आग लगाने से यहां की खूबसूरती बर्बाद होते जा रही है.  जंगल कैसे बचेगा यह चिंता का विषय है. वन एंव पर्यावरण प्रेमी जिसने भी 10 वर्ष पूर्व सारंडा को देखा था वह आज का नजारा देख पीड़ा से कराह उठता है एंव यहीं कहता है कि सारंडा को अब भगवान हीं बचा सकता है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-shortage-of-medicines-in-kolhans-largest-esic-hospital-from-september-2022/">आदित्यपुर

: सितंबर 2022 से कोल्हान के सबसे बड़े ईएसआईसी अस्पताल में दवाइयों का टोटा

धुआं से मेघालया सन सेट प्वाइंट से खूबसूर नजारा नहीं देख पा रहे पर्यटक

[caption id="attachment_581003" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/jangal-aag-3.jpg"

alt="" width="600" height="270" /> सन सेट प्वाइंट से सारंडा का नजारा देखते पर्यटक.[/caption] सारंडा के ग्रामीण भी जंगलों की निरंतर कटाई से चिंतित हैं एंव उन्हें समझ में नहीं आ रहा है की इसे कैसे रोका जाये. क्योंकि इस अभियान में लकड़ी माफिया एंव वनाधिकार पट्टा हासिल करने का लालसा पाने वाले लोग मुख्य रूप से शामिल हैं. अगर यही हाल रहा तो सारंडा के लोगों को पेयजल एंव वनोत्पाद से होने वाली आर्थिक लाभ से भी हाथ धोना पड़ सकता है. जिससे बेरोजगारी एंव भुखमरी की विकट स्थिति उत्पन्न हो जायेगी. दूसरी तरफ सारंडा जंगल में लगी आग से उठने वाले धुआं की वजह से मेघालया सन सेट प्वाइंट से बाहरी पर्यटक सारंडा की खूबसूरती और डूबते सूर्य को सही से नहीं देख पा रहे हैं. बाहर से आने के बावजूद उन्हें वन व पर्यावरण की खूबसूरत नजारे देखने को नहीं मिल पा रहा है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-youth-had-gone-out-with-friends-murdered-and-threw-the-dead-body-into-the-river/">जमशेदपुर

: दोस्तों के साथ निकला था युवक, हत्या कर शव को नदी में फेंका
[wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही