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किरीबुरू : सारंडा के ग्रामीण चिड़िया खदान को 20 मार्च को करेंगे बंद

Kiriburu (Shailesh Singh) : नक्सल प्रभावित सारंडा के छोटानागरा पंचायत अन्तर्गत दुबिल गांव में सारंडा विकास समिति एवं सारंडा महिला विकास समिति के बैनर तले सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम, दुबिल पीढ़ के मानकी दुनु चाम्पिया, गंगदा पंचायत के मुखिया सुखराम उर्फ राजू सांडिल की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई. यह बैठक सेल की चिड़िया खदान के मजदूरों की समस्या को लेकर आयोजित की गई. बैठक में सर्वसम्मति से सेल की चिड़िया खदान को 20 मार्च को बंद करने का फैसला लिया गया. इसे भी पढ़ें : तांतनगर">https://lagatar.in/tantnagar-villagers-protest-against-contractor-for-paying-less-than-minimum-wages/">तांतनगर

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तीस वर्षों से काम करते आ रहे हैं यहां के मजदूर

बैठक के दौरान मुखिया राजू सांडिल, मानकी लागुड़ा देवगम ने कहा कि चिड़िया प्रबंधन ने खदान की ठेका कंपनी के साथ मिलकर खदान में काम करने वाले माईनरों (पत्थर तोड़ने वाले मजदूर) को एक साजिश के तहत हटाकर वहां बाहरी लोगों को लाकर बहाल करना चाह रही है. ये मजदूर लगभग 30 वर्षों से काम करते आ रहे हैं. पहले चिड़िया के सुकरीदुबिल खदान में 900 मजदूर काम करते थे. छटनी करते करते 452 मजदूर रह गये हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से चिड़िया प्रबंधन ने ठेका कंपनी के साथ मिलकर इन मजदूरों को भी बिना नोटिस के काम से हटा रही है अथवा मजदूरों को खदान से हटाकर रोड निर्माण, गेस्ट हाऊस, रेलवे स्टेशन, पत्ता चुनने आदि कार्य में लगाकर वहां से भी हटाने की तैयारी कर रही है. इसे भी पढ़ें : मुसाबनी">https://lagatar.in/musabani-the-great-festival-of-nature-worship-celebrated-at-surda-crossing-baha-bonga/">मुसाबनी

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पीएफ, ग्रेच्युटी दिये बिना ही मजदूरों को बैठा रही है कम्पनी

ऐसे मजदूरों का पीएफ, ग्रेच्युटी आदि दिये बिना ही बैठा दिया जा रहा है. 3-4 माह में एक बार मजदूरों को वेतन दिया जा रहा है वह भी पूरी हाजिरी नहीं बनाया जाता है. चिड़िया में दुबिल गांव के नाम से खदान चल रहा है लेकिन दुबिल गांव का एक भी बेरोजगारों को वर्तमान में रोजगार नहीं दिया गया है. जबकि दुबिल गांव चिड़िया खदान से सटे है और खदान का मिट्टी, मुरुम से ग्रामीणों का खेत, प्राकृतिक नदी-नाला सभी बंजर व प्रभावित हो गये हैं. सभी ने कहा कि हमलोग चुनाव में वोट देकर सांसद, विधायक चुनते हैं, ताकि वह हमारी समस्याओं के साथ खड़ा रहें. लेकिन वह सब भी हमारे हक व अधिकारी की लड़ाई में साथ नहीं देकर हमें अकेला छोड़ दिये हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-disabled-children-celebrated-holi-festival-in-a-special-way-at-cheshire-home/">जमशेदपुर

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बैठक में ये लोग हुए शामिल

बैठक में पूर्व मुखिया भोंज चाम्पिया, मुंडा राऊतु चाम्पिया, मंगल कुम्हार, वीर सिंह हंसदा, देवेन्द्र देवगम, सुनीता देवी, सुनीता बारीक, निशा तांती, चन्द्रावति दास, नीलमणी सांडिल, लक्ष्मी सांडिल, गुरुवारी हुरद, सिरमती कुम्हार, मीनु दास, चांदू चाम्पिया, सुरेश हंसदा, पोदू गोप, चुम्बरु चाम्पिया आदि दर्जनों महिलाएं व ग्रामीण मौजूद थे. [wpse_comments_template]

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