Search

किरीबुरु : थोलकोबाद के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं

  • पांच साल में सिर्फ एक बार वोट देने के समय होती है पूछ
Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा का ऐतिहासिक थोलकोबाद गांव ब्रिटिश सरकार के समय से चर्चित व आकर्षण का केन्द्र रहा है. लेकिन आज इस गांव के ग्रामीण शुद्ध पेयजल समेत तमाम बुनियादी सुविधाओं के लिये तरस रहे हैं. इस गांव के ग्रामीणों को जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन पांच वर्षों में सिर्फ एक बार लोकसभा, विधानसभा एवं पंचायत चुनाव के दौरान सिर्फ वोट डालने हेतु पूछता है. उसके बाद इनकी सुधी लेने कोई भी नहीं जाता है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-appeal-to-make-sanjay-seth-win-in-the-conference-of-village-in-charges-of-ajsu-party/">चांडिल

: आजसू पार्टी के ग्राम प्रभारियों के सम्मेलन में संजय सेठ को जि‍ताने की अपील
थोलकोबाद निवासी गुमिदा होनहागा ने बताया की क्या थोलकोबाद के हम ग्रामीणों की जिंदगी चुनाव के दौरान सिर्फ अपना-अपना एक वोट देने तक सीमित रह गई है. आज हमारे गांव में पेयजल की कोई सुविधा नहीं है. थोलकोबाद एवं दिवेन्द्री गांव के प्रायः ग्रामीण गांव के समीप प्राकृतिक नाला का पानी पेयजल व अन्य कार्य हेतु लेने को विवस हैं. गांव में जलमीनार नहीं है. चापाकल सारे खराब पडे़ हुये हैं. चिकित्सा, संचार, यातायात आदि की कोई सुविधा नहीं है. रोजगार हेतु ग्रामीण युवक निरंतर पलायन कर रहे हैं. हमारा जीवन नारकीय बन गया है. सिर्फ जंगल हीं एक सहारा है. इसे भी पढ़ें : बिरहोर">https://lagatar.in/serious-problem-of-pollution-due-to-coal-mining-in-birhor-settlement-report/">बिरहोर

बस्ती में कोयला खनन से प्रदूषण की गंभीर समस्या : रिपोर्ट
उल्लेखनीय है कि आजादी से पूर्व अंग्रेजों ने थोलकोबाद को अपना शरणस्थली व मौज-मस्ती का स्थान बनाया था. यहाँ तब एक ऐतिहासिक गेस्टहाउस बनाया गया था, जहाँ अंग्रेज रहकर नाच-गान व मस्ती करते थे. गेस्ट हाउस में तब सारी सुविधाएं उपलब्ध थी. कमरों में पारम्परिक पंखा लगा था जिसे रसी के सहारे बाहर बैठकर मजदूर हिलाता था तो पूरा कमरा में हवा फैल जाती है. आजादी के बाद भी इस गेस्ट हाउस में ठहरने के लिये मंत्री, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी से लेकर खास लोग जाते थे, शिकार भी करते थे एवं जंगल की कीमती पेडो़ं को कटवा ले जाते थे. सरकार व वन विभाग थोलकोबाद व सारंडा को पर्यटन स्थल घोषित करने की तैयारी कर ली थी. वर्ष 2001 के दौरान जब नक्सली आये तो यह क्षेत्र विरान हो गया. नक्सलियों ने इस ऐतिहासिक गेस्ट हाऊस को विस्फोट कर उड़ा दिया. नक्सलियों का प्रभाव खत्म होने के बाद वन विभाग ने यहाँ नया गेस्टहाऊस बनाया. इसे भी पढ़ें : पूर्णिया">https://lagatar.in/purnia-criminals-shot-csp-operator-for-protesting-against-robbery/">पूर्णिया

: अपराधियों ने सीएसपी संचालक को गोलियों से भूना, पैसे लेकर फरार
लेकिन आज तक थोलकोबाद गांव की तस्वीर नहीं बदली. बल्कि पहले से यहाँ की खूबसूरती और खराब हो गई. आज गांव में किसी भी प्रकार की कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं है. नक्सली जब थे तो वह लेवी का कुछ पैसा खर्च कर गुंडीजोडा़ स्थित वन विभाग द्वारा बनाया गया चेकडैम के बगल से ग्रामीणों की मदद से एक कच्ची नहर अथवा नाला निकाल थोलकोबाद के खेतों तक पानी पहुंचाये थे. जिससे ग्रामीण खेती कर कुछ फसल उगाते थे. लेकिन आज सब कुछ खत्म हो गया है. सरकार की उपेक्षा से ग्रामीण परेशान व निराश हैं. इसे भी पढ़ें : घुमंतू">https://lagatar.in/nomadic-birhors-have-also-started-considering-the-festival-of-elections-as-the-pride-of-the-country-and-are-excited-about-voting/">घुमंतू

बिरहोर भी समझने लगे हैं चुनाव का पर्व देश का गर्व, मतदान को लेकर हैं उत्साहित

किरीबुरु : राशन कार्डधारियों को केवाईसी कराना अनिवार्य

[caption id="attachment_543595" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/Jharkhand-Ration-Card.jpg"

alt="Jharkhand-Ration-Card" width="600" height="400" /> सांकेतिक तस्वीर[/caption] Kiriburu (Shailesh Singh) : सरकारी राशन कार्ड से राशन लेने वाले उपभोक्ताओं को अब अपने डीलर यहां जाकर ऑनलाइन केवाईसी कराना अनिवार्य हो गया है. यह केवाईसी लगभग 8 वर्षों बाद सरकार द्वारा कराया जा रहा है. केवाईसी कराने का मुख्य उद्देश्य राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सभी सदस्य मौजूद हैं या नहीं. अगर जो सदस्य मौजूद नहीं होंगे, अर्थात किसी की मृत्यु हो गई हो, शादी या अन्य वजह से अन्यत्र चले गये हैं, वैसे लोगों केवाईसी नहीं होने की स्थिति में राशन कार्ड ने नाम हटाया जा सकता है अथवा राशन नहीं दिया जा सकता है. इसे भी पढ़ें : चमरा">https://lagatar.in/strict-action-against-lobin-as-compared-to-chamra-expelled-for-six-years-sita-also-expelled/">चमरा

के मुकाबले लोबिन पर कड़ा एक्शन, छह वर्ष के लिए निष्कासित, सीता भी निष्कासित
केवाईसी कराने के लोगों की भीड़ उमड़ रही है. कई ऐसे लोग हैं जिनका आधार अपडेट नहीं है इसलिए उनका केवाईसी नहीं हो पा रहा है. ऐसे लोग परेशान हैं कि वह अपना आधार कहाँ अपडेट करायें, क्योंकि किरीबुरु-मेघाहातुबुरु व आसपास में आधार अपडेट की कोई व्यवस्था नहीं है. मेघाहातुबुरु डाकघर में आधार अपडेट होता भी था तो वह काफी दिनों से बंद है. इसे भी पढ़ें : राजमहल">https://lagatar.in/independent-dawood-marandi-withdrew-nomination-from-rajmahal-including-2-news-from-sahibganj/">राजमहल

से निर्दलीय दाउद मरांडी ने नामांकन वापस लिया समेत साहिबगंज की 2 खबरें

नोवामुंडी : सीआरपी की मदद से भटका बच्चा पहुंचा अपने घर

[caption id="attachment_887387" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/05/Noamundi-Child-Mila.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> चाईबासा के पांडराशाली में मिला बच्चा.[/caption] Noamundi (Sandip Kumar Prasad) : बड़ाजामदा थाना क्षेत्र के बोकना गांव का एक नाबालिग बच्चा भटक कर चाईबासा के पांडराशाली पहुंच गया था. बच्चा भटकते हुए बाजार क्षेत्र पहुंच गया. वहां जेएसएलपीएस की ड्राइव टीम की नजर बच्चे पर पड़ी. उन्होंने बच्चे के पास जाकर उसके माता-पिता का नाम एवं घर का पता पूछा, तो बच्चा सिर्फ अपने गांव का नाम बोकना ही बता पा रहा था. उसके बाद जेएसएलपीएस ड्राइव टीम ने बच्चे तुरंत ही पांडराशाली थाना को सौंप दिया. साथ ही नोवामुंडी जेएसएलपीएस जेंडर सीआरपी लवली दीदी को जानकारी दी गई. जेएसएलपीएस जेंडर सीआरपी लवली दीदी ने बाल सुरक्षा मंच के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया, ताकि बच्चे के माता-पिता का पता लगाया जा सके. जब इस व्हाट्सएप ग्रुप में गुवा क्लस्टर की रहने वाली जेएसएलपीएस जेंडर सीआरपी गीता देवी को मिली तो तुरंत ही बच्चे के माता-पिता का पता लगाने के लिए बड़ाजामदा क्षेत्र के बोकना गांव पहुंची. इसे भी पढ़ें : अमित">https://lagatar.in/amit-shahs-road-show-is-just-a-jumla-programme-rjd/">अमित

शाह का रोड शो सिर्फ जुमला कार्यक्रम : राजद
गांव के मुंडा विक्रम चाम्पिया से मुलाकात कर बच्चे की पहचान कर उसके माता-पिता के घर पहुंची. वहां बच्चे को पहचान कर कहा कि 2 दिन पहले बच्चा अपनी मां के साथ नोवामुंडी के पदा पहाड़ अपनी दीदी के पास गया था. इस दौरान वह अचानक से गायब हो गया. अपने स्तर से काफी खोजबीन की गई, परंतु वह कहीं नहीं मिला. थक हारकर अपने घर लौट आए. आज जब मुंडा मेरे घर पहुंच कर मेरे बेटे के मिल जाने की सूचना पूरा परिवार खुशी से झूम उठा. बेटे को लेने के लिए माता-पिता चाईबासा के पांडराशाली के लिए रवाना हो गये हैं. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp