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Kiriburu : सेल व टाटा स्टील की खदान प्रबंधनों से ग्रामीण अपना हक लें - रामा पांडेय

Kiriburu (Shailesh Singh) :  सारंडा के बाईहातु गांव मैदान में राजाबेड़ा मुंडा जामदेव चाम्पिया एवं मजदूर नेता रामा पांडेय की मौजूदगी बुधवार को ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक में सेल की गुवा, किरीबुरु, मेघाहातुबुरु एवं टाटा स्टील की विजय-टू लौह अयस्क खदान से प्रभावित सारंडा के विभिन्न गांवों के ग्रामीण शामिल हुए. बैठक में कहा गया कि उक्त चारों खदानों से बह कर आने वाली लाल पानी, मिट्टी, फाइन्स आदि से सारंडा के जोजोगुटु, राजाबेड़ा, बाईहातु, बहदा, सोनापी, काशिया-पेचा, जामकुंडिया आदि गांव पूरी तरह से प्रभावित हैं. इन गांवों के ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ रैयत कृषि भूमि दशकों से बंजर होकर बर्बाद हो चुकी है. खदान से बहने वाली फाइंस व मिट्टी से सारंडा की प्राकृतिक नदी-नाला व झरना का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है. ये सभी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है. इसका पानी का इस्तेमाल से ग्रामीण बीमार होकर मर रहे हैं. खदान से बहकर आने वाली फाइंस रुपी दलदल में अब तक हमारे दर्जनों पालतू जानवर फंसकर मारे जा चुके हैं. इसे भी पढ़ें :  Baharagoda">https://lagatar.in/baharagoda-team-namya-organized-a-workshop-on-menstruation-and-youth/">Baharagoda

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इन सभी समस्याओं से बड़ी समस्या है कि हमारे घर अथवा आंगन में धरती के नीचे खनिज व धरती के ऊपर वन संपदा का भारी भंडार होते हुये भी सारंडा के खदान क्षेत्रों के ग्रामीण बेरोजगार व भुखमरी के शिकार हैं. यहां की खदानों में बाहरी लोगों को लाकर नौकरी दी जा रही है. लेकिन शिक्षित बेरोजगार ग्रामीण युवाओं को नौकरी से वंचित हैं. यहां के लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : Chandil">https://lagatar.in/chandil-claim-of-two-departments-on-one-plot-in-chilagu/">Chandil

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मजदूर नेता रामा पांडेय ने कहा कि पिछले दिनों गुवा खदान में आंदोलन कर खदान से प्रभावित सारंडा के 500 बेरोजगार ग्रामीणों को नौकरी देने की मांग की गई थी. निकट भविष्य में सेल में 400 लोगों को नौकरी देने की योजना है. सेल भी नौकरी में ऐसी शर्त रखती है कि सारंडा के लोग नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं. सेल प्रबंधन खदान में कुछ हिस्सा हैंड माइनिंग के लिये भी दे, ताकि अशिक्षित बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सके. सारंडा के सभी गांवों के ग्रामीणों को संगठित होकर अब अपने हक व अधिकार के लिये लडा़ई लड़ना होगा. पहले सारंडा के सभी गांवों के लोगों को अलग-अलग बैठक कर संगठित होकर चरणबद्ध आंदोलन तेज करना होगा. इसे भी पढ़ें :  Kiriburu">https://lagatar.in/kiriburu-survey-to-remove-problems-of-elephant-movement/">Kiriburu

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उक्त खदान प्रबंधनों के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने से पहले 11 अगस्त को बाईहातु मैदान में सुबह 10 बजे से बैठक होगी. इसमें सभी गांवों से सैकड़ों लोगों को आने के लिए कहा गया है. बैठक में मुंडा जामदेव चाम्पिया, मुंडा कानुराम देवगम, मुंडा मनचुड़िया सिधु, मुंडा प्रीति देवगम, सोनाराम माझी, राजेश सांडिल, मंगता सुरीन, साहू सुरीन, पवन चाम्पिया, गंगाराम चाम्पिया, लंकेश चाम्पिया, ठाकुर सोरेन, मुगा चाम्पिया, लेबेया सिधु, विजय सिधु, मंगल हुरद, प्रदीप माझी, बामिया सुरीन, बामिया चाम्पिया, घासीराम देवगम, सुकराम चाम्पिया आदि सैकड़ों मौजूद थे. इसे भी पढ़ें :  Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-young-rjd-congratulated-shri-ram-yadav-who-was-made-jharkhand-general-secretary-of-rjd/">Adityapur

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