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Kiriburu : मजदूरों का हो रहा शोषण, नहीं मिलता ग्रेच्युटी का लाभ

 
Kiriburu (Shailesh Singh) : टाटा स्टील की विजय-टू खान प्रबंधन अपने अधीन दशकों वर्षों से कार्यरत ठेका मजदूरों का शोषण खदान के विभिन्न वेंडरों के माध्यम से पूरी सिस्टम व रणनीति के तहत करवा रही है. इस सिस्टम की वजह से दर्जनों ठेका मजदूरों को ग्रेच्युटी का पैसा एवं पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पाता है. ग्रेच्युटी एक्ट के मुताबिक अगर कर्मचारी किसी एक संस्थान के अधीन रहकर लगभग वह लगातार 5 वर्ष तक काम करता है तो वह ग्रेच्युटी का लाभ ले सकता है. ग्रेच्युटी का लाभ नौकरी छोड़ने या फिर रिटायरमेंट के बाद मिलता है. लेकिन इस खदान में दशकों वर्षों से कार्यरत दर्जनों मजदूरों को ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलने की मुख्य वजह यह है कि वह एक ही विभाग या स्थान पर दशकों वर्षों से तो काम करते आ रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने हर वर्ष अथवा एक-दो वर्ष के बाद वेंडर अथवा ठेकेदार को बदल देती है. ऐसे में लगभग पांच वर्षों तक एक ही ठेका कंपनी में काम नहीं करने के एवज में मजदूर ग्रेच्युटी का पैसा से वंचित हो जाता है. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-18-lakhs-stolen-by-breaking-the-lock-of-jes-flat-of-subarnarekha-project/">Adityapur

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मजदूरों को उठाना पड़ रहा है नुकसान

मजदूरों का दो ही पैसा बचता है, जिसमें ग्रेच्युटी व पीएफ का पैसा शामिल रहता है. हर माह मिलने वाला वेतन का पैसा तो खर्च हो जाता है. इससे मजदूरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. जानकार बताते हैं कि अगर किसी एक वेंडर या कंपनी के अधीन लगातार 5 वर्ष तक काम करते रहने से हर वर्ष 4.8 फीसदी अर्थात 15 हाजिरी के हिसाब से कुल 75 हाजिरी का पैसा मजदूरों को ग्रेच्युटी के रूप में अलग से मिलता है, जो नहीं मिल पाता है. जितना अधिक वर्ष मजदूर काम करेंगे उतना अधिक लाभ ग्रेच्युटी के रुप में मिलेगा, क्योंकि ग्रेच्युटी का पैसा का हिसाब आखिरी वेतन के हिसाब से होता है. इसे भी पढ़ें : लातेहार">https://lagatar.in/latehar-funds-given-to-the-temple-committee-for-the-construction-of-the-sun-temple/">लातेहार

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चालक से प्रतिमाह वापस लेते हैं पांच हजार रुपये

उन्होंने कहा कि उक्त खदान में काम करने वाले वाहन चालकों को कुशल श्रेणी का पैसा लगभग 778 रुपये प्रतिदिन मिलता है. लेकिन वेंडर द्वारा अपने चालकों के खाते में वेतन का पैसा तो डाला जाता है, लेकिन डालने के बाद चालक से लगभग 5 हजार रुपये विभिन्न तरह से हर माह वापस लेकर उनका शोषण किया जाता है. चालक अगर यह पैसा नहीं देता है तो उन्हें ठेकेदार काम से हटा देता है. खाने के एवज में मिलने वाला 50 रुपये की जगह मात्र 35 रुपये मजदूरों को दिया जा रहा है. ऐसा कर एक वेंडर प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये से अधिक सिर्फ मजदूरों का शोषण कर कमा रहा है. इस वेंडर का सहयोग कंपनी के कुछ अधिकारी खुलेआम कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : मेदिनीनगर">https://lagatar.in/medininagar-body-of-a-youth-found-hanging-from-the-window-of-cni-church/">मेदिनीनगर

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मजदूरों के लूटे गये पैसे वापस करें : बोबोंगा

पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने कहा कि टाटा स्टील खदान के वेंडर श्रीसाईं इंटरप्राइजेज के खिलाफ मजदूरों ने जो आरोप लगाये हैं, वह काफी गंभीर है. पूरे मामले की जांच कंपनी प्रबंधन को निष्पक्ष कर दोषी वेंडर के खिलाफ कार्यवाही करने तथा मजदूरों से लूटे गये पैसे को पुनः वापस दिलाने की मांग की गई है. अन्यथा हम सभी आंदोलन के लिये बाध्य होंगे. [wpse_comments_template]
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