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कोडरमा : खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगने के बाद माकपा के संजय पासवान ने कहा लोगों की आजीविका पर हमला

 
Koderma : सभी आवश्यक वस्तुओं जैसे पैकेट बंद चावल, गेहूं, आटा, दूध, पनीर, छांछ आदि पर जीएसटी लगाने के बाद चहुंओर से इसका विरोध हो रहा है. इसी को लेकर माकपा के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने कहा कि स्वतंत्र भारत ने खाद्य पदार्थों पर ब्रिटिश सरकार के कर नीति को त्याग दिया था. पिछले 75 वर्षों में चावल, गेहूं, दाल जैसे खाद्य पदार्थों पर दही, पनीर, मांस, मछली, गुड़ जैसी दैनिक आवश्यक वस्तुओं पर कभी कर नहीं लगाया गया. यह बढ़ोतरी आजादी का अमृत महोत्सव के इस वर्ष में भारतीय लोगों को मोदी सरकार का `उपहार` है, जो पीड़ादायक और असहनीय है. इसे भी पढ़ें- चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-the-work-of-repairing-the-dilapidated-road-of-the-emergency-ward-of-sadar-hospital-started/">चाईबासा

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अति-अमीरों पर कर लगाना चाहिए- संजय

जिन वस्तुओं पर जीएसटी बढ़ाया गया है उनमें श्मशान शुल्क, अस्पताल के कमरे, लेखन स्याही, कॉपी, पेंसिल, रबड़, शार्पनर शामिल हैं. यहां तक ​​कि अपने बैंक खाते से अपनी बचत निकालने के लिए लोगों को बैंक चेक पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा. लोगों की आजीविका पर यह क्रूर हमला तब है, जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 7 प्रतिशत से ऊपर और थोक मूल्य सूचकांक 15 प्रतिशत से ऊपर है. बढ़ती बेरोजगारी, गिरता रुपया, अभूतपूर्व व्यापार घाटा और एक लड़खड़ाती जीडीपी के साथ यह जीएसटी बढ़ोतरी लोगों की आजीविका को और बर्बाद कर देगी. उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए, मोदी सरकार को अति-अमीरों पर कर लगाना चाहिए और आम लोगों पर अधिक बोझ नहीं डालना चाहिए. इसे भी पढ़ें- सांपों">https://lagatar.in/anupam-is-a-friend-of-snakes-has-rescued-more-than-1500-snakes-so-far/">सांपों

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