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क्या है पूरा मामला
घटना वर्ष 2015 की है. तत्कालीन थाना प्रभारी के नेतृत्व में 25 जनवरी 2015 को गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई. उक्त अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया था. छापेमारी के दौरान राइफल और कार्बाइन भी बरामद किया गया था. इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी के बयान पर सतगावां थाना में मामला दर्ज किया गया. न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से लोक अभियोजक प्रदीप मंडल ने 16 गवाहों का प्रति परीक्षण कराया था और कड़ी सजा की मांग की गई. वहीं बचाव पक्ष से अधिवक्ता लक्ष्मण चौधरी ने अपनी दलीलें पेश की. न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेख पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए अभियुक्त को उपरोक्त धाराओं में दोषी पाया. उस पर 7 वर्ष सश्रम कारावास और दस हजार का आर्थिक जुर्माना लगाया गया. जुर्माने की राशि नही देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास झेलना होगा. इसे भी पढ़ें: जलसंकट">https://lagatar.in/instructions-to-prepare-action-plan-to-deal-with-water-crisis-department-issued-toll-free-number/">जलसंकटसे निबटने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश, विभाग ने जारी किया टॉल फ्री नंबर [wpse_comments_template]

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