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कोडरमा : गुमो के मंदिर में 250 सालों से हो रही दुर्गा पूजा, नौ दिनों तक बलि की भी है परंपरा

Koderma : गुमो में पदमा राजा के समय से शारदीय दुर्गा पूजा मनाने की परंपरा चली आ रही है. करीब 250 साल से शारदीय दुर्गा पूजा समिति पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. यहां पारंपरिक और वैदिक पूजा पद्धति का विशेष ध्यान रखा जाता है. शारदीय दुर्गा पूजा समिति गुमो के अध्यक्ष अशोक पांडेय ने बताया कि कहा कि पिछले 250 साल से मंदिर परिसर में माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है. उन्होंने बताया कि इस साल भी धूमधाम और भव्य तरीके से पूजा की जायेगी. (पढ़ें, जयराम">https://lagatar.in/jairam-ramesh-said-rahul-gandhi-will-meet-sonia-on-september-23-discussion-on-new-president-possible-gehlot-shashi-tharoor-in-delhi/">जयराम

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नवमी के दिन गढ़ से होती है बली की शुरुआत

बलि प्रथा इस दुर्गा मंदिर की खासियत है. कलश स्थापन से लेकर नवमी तक यहां बलि होती है. लेकिन नवमी के दिन सबसे पहले गढ़ में बलि होती है, यह सिलसिला दुर्गा मंदिर में जाकर समाप्त होता है. यह जिले की सबसे पुरानी पूजा पद्धति है. इस मंदिर की देखरेख, पूजा पाठ और मंदिर का विकास करने में सतघरवा परिवार के साथ तीन घरवा, चार घरवा परिवार (जो जियाराम पांडेय, रामसेवक पांडेय और अभय राम पांडेय के वशंज हैं) की विशेष भूमिका होती है. शारदीय दुर्गा पूजा में गांव के अलावा झुमरीतिलैया के लोग भी मदद करते हैं. सभी इलाकों से चंदा आता है. इसे भी पढ़ें : लातेहार">https://lagatar.in/latehar-jayatri-river-got-lost-due-to-encroachment-existence-erased-due-to-land-mafia/">लातेहार

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150 सालों तक गढ़ पर होती थी पूजा

ग्रामीणों के अनुसार, रतन साईं और मर्दन साईं दो भाई थे. जो यहां के जमींदार थे और गढ़ पर रहते थे. उनके द्वारा यहां पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा जाती थी. अंग्रेजों के बढ़ते दबाव के कारण उन्हें अपनी रियासत छोड़कर भागनी पड़ी. इससे पहले उन्होंने अपने कुल पुरोहित जियाराम पांडेय, रामसेवक पांडेय और अभय राम पांडेय परिवार को पूजा की जिम्मेदारी और मंदिर का दायित्व सौंपा था. तकरीबन डेढ़ सौ वर्षो से ज्यादा समय तक गढ़ पर पूजा अर्चना की गयी. काफी दिनों बाद में गढ़ से हटकर एक दुर्गा मंदिर का निर्माण किया गया. जहां माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है. लेकिन आपसी बटवारा के बाद यह मंदिर सतघरवा परिवार को सौंप दी गयी. सबसे पहले गढ़ पर ही पूजा होती है. उसके बाद मंदिर परिसर में पूजा अर्चना होने लगी. इसे भी पढ़ें : मनी">https://lagatar.in/money-laundering-case-jacqueline-fernandezs-designer-lipakshi-summoned-by-delhi-police-will-be-questioned/">मनी

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