Koderma: मरकच्चो प्रखंड के मुख्यालय से 25 किलोमीटर और कोडरमा गिरिडीह मुख्य मार्ग स्थित नवलशाही से 10 किलोमीटर दूर घने जंगल और पहाड़ पर स्थित हैं मां चंचला. चंचलाधाम में खासकर नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है. यहाँ दूरदराज के भक्त माँ के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं. कई श्रद्धालु अपनी मन्नतें को पूरा होने तक दिन-रात बैठे रहते हैं. माता रानी से हाथ जोड़कर मनोकामना पूरी करने की मन्नतें मांगते हैं. मान्यता है कि देवी पर चढ़ाया हुआ बेलपत्र तथा फूल अगर नीचे गिर गया तब मनोकामना पूर्ण माना जाता है और भक्त को मां का आशीर्वाद मिल गया, ऐसा माना जाता है. इसे भी पढ़ें-माता">https://lagatar.in/touch-the-feet-of-your-parents-before-leaving-the-house-rakesh-tiwari/">माता
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नवरात्रि में बढ़ जाती है रौनक
नवरात्रि के 9 दिनों तक चंचाल धाम की रौनक देखने लायक रहती है. मंदिर के पुजारी देवीपुर के निवासी आचार्य रामेश्वर पांडेय और हृदय नारायण पांडे ने बताया कि माँ चंचाल जिस पहाड़ पर है, वह करीब 40 एकड़ में फैला हुआ है. देवीपुर राजघराने के द्वारा 200 साल पहले से पूजा होती आ रही है, ऐसी मान्यता है कि राजा को माँ चंचला ने स्वप्न में पहाड़ पर प्रवास करने की बात बताई थी और पूजा के लिए कहा था. तब से यहां पूजा अर्चना शुरू की गई. जिसके बाद ग्रामीणों ने परंपरागत पुजारी रखा अब हर साल धूमधाम से पूजा होती है. इसे भी पढ़ें-देवघर">https://lagatar.in/read-two-news-of-deoghar-together/">देवघरकी खबरें- मां शक्ति की आराधना में जुटे श्रद्धालु और मारपीट में एक घायल
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